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सूर्य को दिया अर्घ्य, छठी मैया का गुणगान

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33-कैथल। पानी में खड़े होकर छट मैया की पूजा करते हुए - फोटो : Kaithal
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कैथल। रविवार को भी छठ महापर्व की धूम रही। नहाय-खाय के साथ शुक्रवार से पर्व की शुरुआत के बाद शनिवार को खरना पूजन के दौरान महिलाओं ने अरवा चावल और गुड़ से खीर बनाई थी। शाम से शुरू हुआ दो दिवसीय निर्जला व्रत रविवार को जारी रहा। शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर श्रद्धालुओं ने छठ मैया का गुणगान किया।
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मौसमी फल और प्रसाद से भरे सूपों में जलते दीपक को लेकर व्रतियों ने परिवार के सदस्यों के साथ दूध और जल से अभिषेक किया। कई श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर या पूर्ण होने के बाद घर से दंडवत भी छठघाट तक पहुंचे। महिलाओं ने छाज, गन्ना, फल, अदरक, खजूर, छाकवा, मूली, हल्दी, नारियल, संतरा, नींबू सहित अन्य सामग्री से छह माता की पूजा की। पूजन के बाद महिलाओं ने पानी में खड़े होकर अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य दिया। फिर व्रती वापस वेदिका के सामने पहुंचीं। वेदी के सम्मुख कंद, मूल और फल के साथ ही पूजन के लिए तैयार पकवान रख महिलाओं ने आरती उतारी। प्रणाम कर मनवांछित फल मांगा। इसके बाद पति के हाथों प्रसाद ग्रहण किया।
उधर, डेरा बाबा शीतलपुरी के घाट पर शाम के समय पूजा-अर्चना के लिए भारी भीड़ उमड़ी। यहां केवल कैथल शहर ही नहीं, बल्कि पूरे जिले से पूर्वांचल के लोग पहुंचे। महिलाओं से घाट के सरोवर में स्नान कर भगवान सूर्य व छठ माता की उपासना की। घाट पर सुरक्षा को लेकर समिति की ओर से विशेष व्यवस्था बनाई थी। यहां पर महिलाएं ही नहीं, बल्कि बच्चे, युवा और युवतियां भी पर्व को मनाने के लिए पहुंची थी।
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शाम को आयोजित छठ मैया के जागरण में बाबा विश्वकर्मा जागरण ग्रुप के भजन गायक प्रशांत विश्वकर्मा और कीर्ति रावत ने गुणगान किया। पूर्वांचल जन विकास मंच के जय कृष्ण ने बताया कि पूर्वांचल के लोगों में छठ का पर्व को लेकर काफी उत्साह रहता है। इस दौरान सीमित समय में भंडारा भी लगाया गया। इस मौके पर अशोक साहू, आशा देवी, रिंकू देवी, मंगली देवी, अजय कुमार, जोगिंद्र, विजय, रानी, संगीता, चंदेश्वर चौधरी मौजूद रहे।
उगते सूर्य को अर्ध्य देने के साथ होगा व्रत का पारण
तीसरे दिन शाम को बांस की टोकरी में फलों, ठेकुआ, चावल के लड्डू आदि से अर्घ्य का सूप सजाया जाता है, जिसके बाद व्रती अपने परिवार के साथ सूर्य को अर्घ्य देते हैं। अब सोमवार की सुबह उगते हुए सूर्य को दूसरा अर्घ्य दिया जाएगा और अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाएगा।
पूरी तरह से प्रकृति की पूजा है छठ
छठ व्रत पूरी तरह से प्रकृति की पूजा है। इसमें नए फसल, मौसमी फल के साथ नदी, तालाब, पोखर में भगवान सूर्य अर्घ्य दिया जाता है। भगवान सूर्य की उपासना का पर्व छठ आरोग्यता प्रदान करने का व्रत है। इस पर्व को लोग धन, धान्य व सुख समृद्धि की कामना को लेकर करते हैं। ऐसी मान्यता है कि छठ के व्रतियों में सूर्य की वह ऊर्जा विद्यमान हो जाती है कि व्रती पूरे साल बीमारियों से दूर रहता है। चर्म रोगों में छठ का व्रत विशेष लाभकारी माना जाता है।
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