शिक्षा विभाग के लाख प्रयासों के बावजूद अध्यापक संगठनों के आह्वान पर अध्यापकों ने टीएनए परीक्षा नहीं दी। सोमवार को जिलेभर में बनाए गए सात परीक्षा केंद्रों में परीक्षा देने के लिए एक भी अध्यापक नहीं पहुंचे।
अलबत्ता अध्यापकों ने परीक्षा केंद्रों के बाहर धरना देकर विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वहीं अध्यापकों द्वारा परीक्षा न देने संबंधी मुद्दा दिनभर शहर में चर्चा का विषय बना रहा।
स्वयं कुछ अध्यापकों का मानना था कि परीक्षा न देकर कई अध्यापकों की खाल बच गई है जिन्हें परीक्षा को लेकर खौफ महसूस हो रहा था। अब विभाग क्या कार्रवाई करता है यह देखना होगा।
राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय व राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। जहां एक परीक्षा सुबह 9 बजकर 30 मिनट से लेकर 11 बजे एवं दूसरी 11 बजकर 30 मिनट से 1 बजकर 30 मिनट तक आयोजित होनी थी।
लेकिन सुबह की परीक्षा में ही कोई अध्यापक परीक्षा देने नहीं पहुंचा। अध्यापक परीक्षा केंद्रों के बाहर एकत्रित हो गए तथा बाद में सभी ने बाहर धरना शुरू कर दिया।
जिले के कुल सात परीक्षा सेंटरों पर 1195 जेबीटी टीचरों परीक्षा देनी थी लेकिन किसी भी अध्यापक ने परीक्षा नहीं दी। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में जेबीटी के कुल 200 अध्यापकों ने टीएनए की परीक्षा देनी थी।
परीक्षा केंद्र अधीक्षक अशोक कुमार ने बताया कि उन्होंने अध्यापकों की परीक्षा के लिए सभी तैयारियां कर ली थी। जिसके लिए 10 प्राध्यापिकाओं को परीक्षा में ड्यूटी के लिए नियुक्त कर दिया गया था। लेकिन कोई भी अध्यापक परीक्षा देने के लिए नहीं पहुंचा।
दूसरी ओर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बने परीक्षा केंद्र में 208 अध्यापकों ने टीएनए की परीक्षा देनी थी। परीक्षा केंद्र अधीक्षक विनय कुमार गुलाटी ने बताया कि अध्यापकों उनके परीक्षा केंद्र में परीक्षा देने के लिए कोई अध्यापक नहीं आया है।
30 मई को मास्टरों की टीएनए परीक्षा होनी है। इसके अलावा पूंडरी, सीवन, गुहला-चीका, कलायत व राजौंद में भी एक-एक परीक्षा केंद्र बनाया गया था।
बच गई गुरुजी की साख: टीएनए परीक्षा न देकर जिले में गुरुजी की साख बच गई। सुबह जब शहर वासियों व विद्यार्थियों को पता चला कि अध्यापकों की परीक्षा ली जा रही है। जिसके विरोध में अध्यापक नारेबाजी कर रहे है। शहर वासियों व विद्यार्थियों ने अध्यापकों का जमकर मजाक उड़ाया।
कुछ लोगों का कहना था कि गुरुजी विद्यार्थियों की परीक्षा ले रहे हैं। जब उन्होंने परीक्षा देने का समय आया तो विरोध कर रहे है। ऐसे में अध्यापकों की साख भी शहर में खराब हुई है।
धरने पर बैठे अध्यापकों में से ही कुछ अध्यापकों ने बताया कि उनके विभाग ने भी कुछ ऐसे अध्यापक है जिनका विषय में हाथ कमजोर है। परीक्षा का बहिष्कार करने से ऐसे कई अध्यापक बच गए हैं।
परीक्षा नहीं, अध्यापकों को प्रशिक्षण दो: परीक्षा केन्द्रों के बाहर बहिष्कार कर धरने पर बैठे अध्यापकों ने बताया कि अध्यापकों की परीक्षा लेना एक तुगलकी फरमान है।
जो अध्यापक व विद्यार्थी के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने कहा कि अगर शिक्षण प्रणाली में किसी प्रकार का सुधार लाना है तो अध्यापकों को विषय के अनुसार प्रशिक्षण देना चाहिए। जिसमें अध्यापकों को शिक्षण के संबधित आने वाले समस्याओं के समाधान के लिए जागरूक किया जाना चाहिए।
रिपोर्ट भेज दी गई है: उप जिला शिक्षा अधिकारी शमशेर सिरोही ने बताया कि परीक्षा केंद्रों पर परीक्षाओं के बहिष्कार पर बैठे अध्यापकों को समझाने का प्रयास किया गया है।
जिले के सभी बीईईओ ने परीक्षा केंद्र में अध्यापकों को परीक्षा देने के लिए आह्वान किया लेकिन जिले के किसी भी परीक्षा केंद्र में अध्यापकों ने परीक्षा नहीं दी है। जिसकी सूचना शिक्षा विभाग को दे दी गई है।