संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। रूस-यूक्रेन युद्ध में सेना में शामिल हुए युवाओं का सुराग न मिलने पर मटौर के ग्रामीणों में रोष है। रोष स्वरूप ग्रामीणों ने शुक्रवार को लघु सचिवालय में पहुंचकर डीसी प्रशांत पंवार से मुलाकात की और बच्चों को वापस बुलाने से संबंधित ज्ञापन भी सौंपा। इसके साथ ही नाराज ग्रामीणों ने डीसी से युवाओं को रूस भेजने वाले एजेंट के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि गांव के ही एक एजेंट ने इन युवाओं को अच्छी नौकरी का प्रलोभन देकर रूस-यूक्रेन के युद्ध में धकेला है।
गौरतलब है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान इनमें से एक युवक के गोली लगने से घायल की भी खबर मिली है। नाराज ग्रामीणों ने बताया कि 12 मार्च के बाद इन युवाओं को कोई बातचीत नहीं हो सकी है। इसके बाद उनके साथ कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है।
गौरतलब है कि मटौर गांव से साहिल, रवि और मोहित सहित चार अन्य युवक एजेंट के माध्यम से रूस गए थे। उनका पता न चलने से ग्रामीण परेशान हैं। इस मौके पर मनदीप, विजेंद्र, रामफल, गांधी, दिलबाग, कृष्ण, ओम प्रकाश, अनिल, सुनेहरा, अजय, खुशी आदि मौजूद रहे।ॉ
यह है पूरा मामला
गांव के सोनू ने बताया कि एक एजेंट ने सात युवाओं को नौकरी का लालच देकर रूस की सेना में सफाई के काम पर रखा। लेकिन बाद में 10 दिन का प्रशिक्षण देकर युद्ध में धकेल दिया। इसमें सात युवाओं में शामिल एक युवा की ओर से परिजनों को उसकी मेडिकल रिपोर्ट भी सामने आई थी। इन युवाओं को वापस भारत लाने के लिए वे कुछ दिन पहले दिल्ली स्थित दूतावास में भी गए थे। वहां पर उन्होंने आश्वासन दिया कि इन युवाओं को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सोनू ने कहा कि सरकार ने युवाओं को वापस लाने का आश्वासन तो दिया, लेकिन एजेंट के खिलाफ अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है।