संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। श्री ग्यारह रुद्री मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान कथा के तीसरे दिन आचार्य भारद्वाज ने भक्ति मार्ग से श्रद्धालुओं को रूबरू करवाया। भागवत ज्ञान का अमृत पान कराया। समझाते हुए कहा कि भक्ति का दूसरा नाम प्रभु पर पूर्ण विश्वास करना है।
उन्होंने कहा कि प्रभु का नाम स्मरण करना बहुत ही सरल है। भक्ति आसान व सरल है तथा नाम जप के बिना मानव का कल्याण नहीं हो सकता। कहा कि पापी तथा दुष्ट भी यदि अपने बच्चों के नाम भगवान के नाम पर रख लेते है तो भी उनका जीवन अंत समय में सुधर जाता है। मृत्यु के बाद जीवन का लेखा-जोखा में केवल प्रभु नाम सिमरण ही उसको भव सागर से पार करता है।
अजामिल का उदाहरण देते हुए कथा व्यास ने कहा कि वह जन्म से अधम था पर उसके पुत्र का नाम उसने नारायण रख दिया। अंत समय में उसे जब विकराल दूत लेने आए तो उसने डरकर अपने पुत्र नारायण को पुकारा तो प्रभु ने सुना कि उसे कोई याद कर रहा है तथा प्रभु केवल नाम लेने से ही प्रकट हो गए।
उन्होंने कहा कि संकेत से, हास से, परिहास से या तान के अलाप के समय किसी अवहेलना करने में भी यदि भगवान के नाम का स्मरण हो जाए तो जीव के पाप कट जाते है। बृत्रासुर का जिक्र करते हुए कथा व्यास ने कहा कि ब्रह्मानिष्ठ ऋषि दधीची की अस्थियों से तीन अस्त्र बने थे जिनमें से एक वज्र इंद्र के हाथ में था जिससे उसने बृत्रासुर से युद्ध करता देख दानव ने इंद्र से कहा कि जीत तो तुम्हारी होगी पर अस्त्र से मर कर मै गोलोक में जाने का अधिकारी हो जाऊंगा। कहा कि भक्ति का दूसरा नाम है विश्वास, प्रभु मेरी रक्षा करेंगे ऐसा मन में विश्वास हो। परमात्मा से संबंध जोड़ो।