कैथल। टाटा मुंबई मैराथन विश्व की शीर्ष मैराथन में से एक है, जो हर वर्ष जनवरी माह के तीसरे रविवार को आयोजित होती है। इसमें देश-विदेश के प्रतिभागी हिस्सा लेते हैं। इस बार लगभग 12 हजार महिला और पुरुष प्रतिभागियों ने इसमें भाग लिया। 18 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति इस मैराथन में भाग ले सकता है।
इस प्रतिष्ठित मैराथन में कैथल के रहने वाले अंकित खुरानिया ने 42.195 किलोमीटर की दौड़ में भाग लिया। उन्होंने यह दूरी चार घंटे 37 मिनट और 54 सेकंड में पूरी कर शानदार प्रदर्शन किया। अंकित ने एक किलोमीटर की दूरी केवल छह मिनट और 37 सेकंड में तय की। उनकी इस उपलब्धि पर कैथल में खुशी का माहौल है। परिवार और शुभचिंतकों ने उन्हें फोन पर बधाई दी। आईजी कॉलेज में प्रबंधक समिति के प्रधान उनके पिता राम बहादुर खुरानिया ने कहा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है। उनकी मां और परिवार के अन्य सदस्यों ने भी उनकी इस सफलता पर उन्हें शुभकामनाएं दीं। खुरानिया ने बताया कि वह 41 वर्ष के हैं। एक साल पहले उन्होंने खुद को चुनौती दी थी कि वह इस मैराथन को जीतेंगे। यह मैराथन छत्रपति शिवाजी टर्मिनल से शुरू होकर मुंबई के समुद्र पर बने पुल से गुजरते हुए वापस उसी स्थान पर समाप्त हुई। अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी इस दूरी को सवा दो घंटे में पूरी कर लेते हैं। जबकि वह जैसे लोग, जो नियमित खिलाड़ी नहीं हैं, इस दूरी को साढ़े तीन से छह घंटे में पूरा करते हैं। अंकित ने कहा कि इस मैराथन में अलग-अलग श्रेणियां होती हैं, जैसे पांच किलोमीटर, 10 किलोमीटर, 21 किलोमीटर (हाफ मैराथन), और 42.195 किलोमीटर की फुल मैराथन। इससे पहले वह दिल्ली, गुरुग्राम, जयपुर और कोलकाता में भी मैराथन में भाग ले चुके हैं। कोलकाता में पिछले साल दिसंबर में उन्होंने 25 किलोमीटर की मैराथन पूरी की थी। उन्होंने बताया कि वह गुरुग्राम में एक अंतरराष्ट्रीय अमेरिकी बैंक में काम करते हैं। 12 वर्षों तक ऑफिस और घर की व्यस्त दिनचर्या के बीच उन्होंने महसूस किया कि कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे शरीर और मन को लाभ हो। उन्होंने दौड़ को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का निर्णय लिया। इसमें उनके बड़े भाई मोहित खुरानिया ने प्रेरणा दी, जो खुद भी दौड़ और क्रिकेट में सक्रिय हैं। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी उनका पूरा सहयोग किया।
अंकित ने कहा कि यह मेरे लिए बेहद खुशी और गर्व का पल है। मैंने यह साबित किया कि यदि मन में ठान लें तो कुछ भी असंभव नहीं है। यह दूसरों के लिए भी प्रेरणा है कि वे अपनी व्यस्त जिंदगी में से कुछ समय अपने लिए निकालें। जीवन में कुछ ऐसा करें, जिसे लोग लंबे समय तक याद रखें।