संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिला बार परिसर में लंबे समय से बंद पड़ी कैंटीन को अधिवक्ताओं की ओर से प्रयोग करने के मामले में अधिवक्ताओं ने वीरवार को लघु सचिवालय में पहुंचकर प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं की यह नाराजगी डीसी के फैसले के खिलाफ थी। नाराज अधिवक्ताओं का कहना था कि डीसी जब तक अपना बर्ताव सही नहीं करते, तब तक उनका प्रदर्शन लगातार जारी रहेगा।
गौरतलब है कि अधिवक्ताओं ने राजस्व कोर्ट का 15 अप्रैल को बहिष्कार किया था। इसके बाद से ही अधिवक्ता डीसी के खिलाफ मुखर हुए हैं। इस प्रदर्शन की अध्यक्षता जिला बार एसोसिएशन के प्रधान बलजिंद्र सिंह मलिक ने किया। अधिवक्ताओं ने लघु सचिवालय में गेट के बाहर प्रदर्शन कर नारेबाजी की। जिला बार एसोसिएशन का कहना है कि जब तक डीसी उनके साथ किए गए दुर्व्यवहार पर माफी नहीं मांगते तब तक राजस्व अदालतों का बहिष्कार और विरोध जारी रहेगा। एसोसिएशन के प्रधान बलजिंद्र सिंह मलिक ने कहा कि कई साल से खाली पड़े कैंटीन के हाॅल का प्रयोग 12 एसोसिएशन अधिवक्ताओं के बैठने के लिए करना चाहती थी।
अधिवक्ताओं ने तो इस बारे में डीसी को लिखित शपथ पत्र देने की बात तक भी कही थी। इस पर डीसी ने मौखिक रूप से हां भी कर दी और एसोसिएशन ने कैंटीन की अच्छी तरह से साफ सफाई करवा कर वहां पर वकीलों के बैठने की व्यवस्था कर दी। इसके बाद नौ अप्रैल को अचानक तहसीलदार और नायब तहसीलदार पुलिस बल के साथ वहां आए और कैंटीन को ताला लगा कर चले गए। जब इस बारे में एसोसिएशन के सचिव गौरव वधवा ने उन्हें कहा कि कैंटीन को ताला मत लगाओ और प्रधान के आने की इंतजार करें, हम बैठकर बात कर लेंगे तो दोनों अधिकारियों ने सचिव के साथ दुर्व्यवहार किया। जब इस मसले पर बातचीत करने के लिए अधिवक्ताओं का एक शिष्टमंडल डीसी से बातचीत करने के लिए उनके कार्यालय में मिला तो उसे समय डीसी ने उसे ठीक से बातचीत भी नहीं की।
गौरतलब है कि कैंटीन के कमरे को प्रयोग करने के मामले पर डीसी के व्यवहार से खफा बार एसोसिएशन ने 15 अप्रैल को डीसी, एसडीएम और तहसीलदार की अदालतों का बहिष्कार करने का एलान किया का। बार एसोसिएशन मैं फैसला किया था कि कोई भी अधिवक्ता इनकी अदालतों में नहीं जाएगा। यदि कोई वकील उनकी अदालत में गया तो उस पर 11 हजार रुपये जुर्माना लगाया जाएगा। उस दिन से सभी अधिवक्ता राजस्व अदालतों का बहिष्कार कर रहे हैं। कोई भी अधिवक्ता इन अदालतों में पेश नहीं हो रहा है। डीसी अधिवक्ताओं की गैर मौजूदगी में विचाराधीन मामलों को खारिज कर रहे हैं। इसलिए वे राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को शिकायत करेंगे।