संवाद न्यूज एजेंसी
ढांड। मनरेगा मजदूर यूनियन संबंधित एआईयूटीयूसी के कार्यकर्ताओं ने जिला प्रधान मोहन लाल व सचिव विनोद के नेतृत्व में अपनी मांगों के संदर्भ में बीडीपीओ कार्यालय ढांड में प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान उन्होंने मनरेगा मजदूरी स्कीम में शोषण का आरोप लगाया।
ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष कामरेड राजकुमार सारसा ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि मनरेगा मजदूरों की पारिवारिक आर्थिक स्थिति काफी कमजोर है। इसके लिए उन्हें अपने परिवार को गुजारा करने के लिए प्रतिदिन दिहाड़ी के लिए काम की तलाश करनी पड़ती है। कभी काम मिल जाता है और कभी नही।
ऐसे हालात में उनके लिए परिवार को दो वक्त की रोटी नसीब करवाना मुश्किल हो रहा है, लेकिन सरकार की ओर से गरीबों के लिए चलाई गई मनरेगा मजदूरी स्कीम में भी उनका शोषण हो रहा है। सरकार की ओर से मजदूर पंजीकरण जाब कार्ड में 200 दिन का काम देने की गारंटी देता है लेकिन धरातल पर 100 दिन भी काम नही मिल पा रहा है।
उन्होंने कहा कि उनकी मुख्य मांगें ढांड क्षेत्र के सभी गांवों में मनरेगा का काम सुचारु रुप से शुरू किया जाए। मनरेगा मजदूरों को 700 रुपए प्रति दिन दिहाड़ी दी जाए। मनरेगा का काम मशीनों से करवाने पर रोक लगाई जाए। मनरेगा की जिला व खंड स्तर की निगरानी कमेटी में यूनियन का प्रतिनिधि शामिल जाए। ऑनलाइन हाजिरी ना लगने की सूरत में पर ऑफलाइन हाजिरी लगाई जाए और साइट ना चलने पर मजदूरों को घर वापस ना भेजा जाए।
सभी मजदूरों को निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड में बिना किसी मजदूर विरोधी शर्त के पंजीकृत किया जाए। मनरेगा मजदूरों की दुर्घटना में मृत्यु पर कम से कम 10 लाख रुपये परिवार को मुआवजा दिया जाए व 10 हजार रुपये मासिक पेंशन दी जाए। मनरेगा मजदूरों को कस्सी, तसले, गत्ता आदि औजार व पीने का पानी सहित अन्य जरूरी सुविधाएं मनरेगा साइट पर ही उपलब्ध करवाई जाएं।