कैथल। प्रदेश में 15 नवंबर को सरकारी धान खरीद बंद होने के बाद घोटाले से जुड़े आरोपों ने जोर पकड़ लिया है। किसानों का कहना है कि पूरे सीजन में पीआर धान की खरीद में अवैध कट, नमी के नाम पर रेट घटाना, कम मूल्य पर खरीद कर कच्ची पर्ची देना और मिलों में गड़बड़ी जैसे कई मामले सामने आए। इस पर सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक टीमें राइस मिलों में भौतिक सत्यापन केवल खानापूर्ति के तौर पर कर रही हैं। भारतीय किसान यूनियन चढूनी के युवा प्रदेशाध्यक्ष विक्रम कसाना ने कहा कि मंडियों में इस सीजन में जमकर लूट हुई है। करोड़ों का घोटाला राइस मिलर, खरीद एजेंसी, आढ़ती और मंडी सचिव की मिलीभगत से हुआ है, लेकिन प्रशासन मामले को दबा रहा है। संवाद