संगतपुरा पुलिस चौकी में तैनात पुलिस यदि समय रहते मेरी बात सुन लेती तो मेरा भतीजा आज जिंदा होता। ये कहकर गांव बरटा निवासी कृष्ण कुमार जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम हाउस के बाहर फफक पड़े। कृष्ण लाल यहां अपने भतीजे संदीप की हत्या के बाद पोस्टमार्टम करवाने के लिए पहुंचे थे। उन्होंने भतीजे की हत्या के मामले में पुलिस पर लापरवाही और मिलीभगत का आरोप लगाया है।
दरअसल गांव बरटा में डेरे की रास्ते की जमीन को लेकर डेरे की संगत और एक पक्ष के बीच विवाद चल रहा था। इसमें डेरे की संगत की ओर से शिकायत पुलिस चौकी संगतपुरा को दी गई थी, लेकिन पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। मृतक के चाचा कृष्ण दत्त ने बताया कि संगत की सूचना पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। आरोपी पक्ष लगातार रास्ते की जमीन को काटता जा रहा था। उन्होंने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि घटना के दौरान भी उन्होंने पुलिस को कई फोन किए। मजबूरन जब कंट्रोल रुम में 100 नंबर पर फोन किया तो वहां से सूचना मिलने पर चौकी से पुलिस आई। इसके बाद आने पर भी उसे ही धमकाया गया कि बार-बार फोन कर रहे हो। इसके बाद उसके भतीजे का शव ढूंढा गया। यदि पुलिस समय पर आ जाती तो शायद बचाव हो सकता था।
डेरे में सेवा करता था मृतक संदीप
मृतक संदीप के दो बड़े भाई हैं। बड़ा भाई व खुद गांव में ही खेती बाड़ी का काम करता था। उसका मंझोला भाई पूंडरी में चिकित्सीय व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। संदीप अभी अविवाहित ही था और खेती बाड़ी के काम के साथ डेरे में सेवा करता था और डेरे में ही सोता था। रविवार की रात को भी वह डेरे में सोने जा रहा था। इस दौरान आरोपियों ने उसे घेर कर उसकी हत्या की है।
दो कर्मचारियों पर लापरवाही की गाज, प्रभारी के खिलाफ होगी जांच
परिजनों की शिकायत पर एसपी लोकेंद्र सिंह ने कार्रवाई करते हुए संगतपुरा पुलिस चौकी के मुंशी विजेंद्र सिंह के अलावा हेडकांस्टेबल जसबीर सिंह को लाइन हाजिर कर दिया है। वहीं चौकी प्रभारी सुरेश कुमार के खिलाफ जांच का जिम्मा डीएसपी कुलवंत को सौंपा गया है। जिसमें जांच की जाएगी कि प्रभारी के स्तर पर क्या लापरवाही थी।