गुहला-चीका। भारतीय किसान यूनियन के जिला कैथल प्रभारी लखविंद्र सिंह किंद्र ने घग्गर नदी के साइफनों की सफाई के दौरान निकलने वाली मिट्टी को बेचने के घोटाले की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई है। उन्होंने इसमें ठेकेदार संग अधिकारियों की भी मिलीभगत का आरोप लगाया है। किसान नेता रविवार को किसान भवन चीका में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष बाढ़ में किसानों को जान व माल का भारी नुकसान हुआ था, लेकिन प्रशासन ने इससे कोई सबक नहीं लिया। सबसे पहले टूटने वाले घग्गर नदी के सिहाली बांध को प्रशासन ने नहीं बांधा। वहीं जब दोबारा बाढ़ आने की संभावनाएं बढ़ गई तो किसानों ने अपने खर्चे पर स्वयं ही बांध को बनाने का काम किया। प्रशासन ने अब कहीं जाकर घग्गर नदी के टटियाना व सरोला स्थित बांध की सफाई का ठेका दिया है। इसमें भी ठेकेदार ने मिट्टी बेचनी शुरू कर दी, जबकि सरकार की ओर से जारी की निविदा सूचना में स्पष्ट निर्देश हैं कि ठेकेदार मिट्टी नहीं बेचेगा और घग्गर नदी के पास निर्धारित स्थल पर ही मिट्टी जमा करेगा, ताकि यदि दोबारा बाढ़ की स्थिति पैदा हुई तो फटाफट मिट्टी के थैले भर कर बांधों पर रखे जा सकें। आरोप लगाया कि मिट्टी घोटाले पर पर्दा डालने के लिए प्रशासन ने पूरी स्क्रिप्ट पहले से ही तैयार की हुई है और अब अधिकारी घोटाले से बचने का रास्ता निकालते हुए यह कह रहे हैं कि कुछ मिट्टी को गांव पीडल स्थित विश्रामगृह व गांव भूना में भिजवाया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि बांध से बेची गई मिट्टी की उच्च स्तरीय जांच करके संबंधित ठेकेदार, अधिकारियों व अन्य लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने सही ढंग से जांच नहीं की तो भाकियू धरना व प्रदर्शन करने से भी पीछे नहीं हटेगी, जिसकी जिम्मेवारी पूरी तरह सरकार व प्रशासन की ही होगी।