संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) टीम ने शनिवार को पब्लिक हेल्थ विभाग के रिश्वत लेने वाले तीन कर्मचारियों को अदालत में पेश किया। अदालत ने उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए तीनों को जेल भेजने का आदेश दिया।
आरोप है कि कर्मचारियों ने बिल पास कराने के बदले रिश्वत ली। डिप्टी सुपरिंटेंडेंट कमलकांत ने 20 हजार रुपये, जबकि अन्य दो कर्मचारियों अशोक कुमार और बलजीत ने 5-5 हजार रुपये लिए थे। इस मामले में कुल 30 हजार रुपये की रिश्वत बरामद की गई।
विजिलेंस इंस्पेक्टर सूबे सिंह सैनी के नेतृत्व में टीम ने शुक्रवार दोपहर के समय कार्यालय पर छापेमार कार्रवाई की थी। टीम ने डिप्टी सुपरिडेंट कमलकांत को 20 हजार रुपये, जबकि एच.के.आर.एन. कर्मचारी अशोक कुमार व बलजीत को 5-5 हजार रुपये की रिश्वत लेते दबोचा था। जानकारी अनुसार आरोपी कमलकांत ने रिश्वत के पैसे तुरंत अपनी जेब में डाल लिए थे, जबकि अन्य कर्मचारियों ने पैसे अलमारी में छिपाए थे, जिन्हें विजिलेंस ने मौके पर ही बरामद कर लिया।
शिकायतकर्ता ठेकेदार विशाल भारद्वाज ने आरोप लगाया था कि आरोपी बिल पास करने के नाम पर कुल राशि का दो प्रतिशत (डिप्टी सुपरिंटेंडेंट) और एक-एक प्रतिशत (अन्य कर्मचारी) कमीशन मांग रहे थे। आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2016 के कार्यों से संबंधित बिल और कोटेशन बिना किसी आरटीआई प्रक्रिया के कथित तौर पर विरोधियों बलबीर रोहेड़ा और राधेश्याम प्रजापति को उपलब्ध करवा दिए। इसके बाद ठेकेदार से कथित रूप से करोड़ों रुपये की मांग कर मानसिक रूप से प्रताड़ित और ब्लैकमेल किया गया।
रिश्वत की बात से परेशान होकर ठेकेदार ने आरोपियों की बातचीत रिकॉर्ड कर विजिलेंस को सौंप दी। इसी आधार पर एसीबी ने रणनीति बनाकर कार्रवाई की। छापेमारी के दौरान डीआरओ चंद्रमोहन ड्यूटी मजिस्ट्रेट के रूप में मौजूद रहे।
इंस्पेक्टर सूबे सिंह ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया।