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ग्राम सचिवालयों में बैठने के लिए सीएससी संचालकों के एग्रीमेंट रद्द

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ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों के माध्यम से ई-सर्विस उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से ग्राम सचिवालयों में बैठे कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) संचालकों का एग्रीमेंट रद्द कर दिया गया है। वे अब ग्राम पंचायत का कार्य नहीं कर पाएंगे। बताया जा रहा है कि सरकार क्रिड नामक नई व्यवस्था लागू कर रही है।
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सीएससी संचालक अजीत जांगड़ा, मनोज कुमार, नरेश कुमार, शिव कुमार व संदीप कुमार के अनुसार सरकार द्वारा 6000 फिक्स सहित अन्य सुविधाएं देने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर शुरू किए गए थे। एक साल से भुगतान नहीं होने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट के आदेश पर विभाग ने उन्हें ढाई लाख से ज्यादा रुपये का लंबित मानदेय दे दिया। अभी उनका 5 लाख रुपये के करीब मानदेय लंबित है। यही स्थिति हरियाणा के अनेकों जिलों में कार्यरत सीएससी संचालकों की है।
अब विभाग ने सभी सीएससी संचालकों के एग्रीमेंट एकदम से रद्द कर दिए हैं। जिस हड़कंप मचा है कि जिनका भुगतान अभी तक नहीं हुआ है, कैसे होगा। लाखों रुपये का भुगतान लंबित है। नई व्यवस्था कब लागू होगी? क्या नियम होंगे?। अभी इस संबंध में कोई आदेश या जानकारी नहीं है। उनकी मांग है कि इस व्यवस्था को सुधार के साथ लागू किया जाए। ताकि काम करने वाले युवाओं को रोजगार भी मिले और गांव के लोगों को उनके घर द्वार पर सुविधा।
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इस संबंध में जिला सीएससी योजना के इंचार्ज वसीम ने कहा कि जिले में करीब 113 सीएससी हैं। जो ग्राम सचिवालयों में चल रही हैं। उनके ग्राम सचिवालय में बैठने के एग्रीमेंट रद्द किए गए हैं। सरकार द्वारा नई व्यवस्था में सिटीजन रिसॉर्स इनफोरमेशन विभाग (क्रिड) द्वारा वीएलयू का नया कान्सेप्ट बनाया है। जो सीएससी संचालक नई योजना में शिफ्ट होगा, उसके साथ नए सिरे से अनुबंध किया जाएगा। जो नहीं शिफ्ट होगा, उसके लिए विभागीय आदेशानुसार काम किया जाएगा। पहले व्यवस्था में 6000 रुपये मानदेय दिया जाता था। अब नए सिस्टम में जितना काम करेंगे, उतने भुगतान की बात पता चली है।
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