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मंडियों में आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे आढ़ती

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जिले की अनाज मंडियों के आढ़ती सोमवार से अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल करें। आढ़तियों ने पहले दिन मार्केट कमेटी कार्यालय परिसर में धरना देने की योजना बनाई है। इसके बाद 20 सितंबर को शहर में जुलूस निकालकर विधायक निवास व 21 सितंबर को करनाल में मुख्यमंत्री आवास पर रोष प्रदर्शन की रणनीति तैयार की है।
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जिला मंडी एसोसिएशन के प्रधान अश्विनी शोरेवाला व नई अनाज मंडी प्रधान श्याम लाल गर्ग ने कहा कि सरकार आढ़तियों की मांगों को लेकर गंभीर नहीं है, इस कारण मजबूरन आढ़तियों को हड़ताल पर जाना पड़ रहा है। सरकार हर बार सीजन में नए-नए नियम लागू कर आढ़तियों को परेशान करने में लगी हुई है, इससे आढ़तियों को काफी परेशानी आती है। आढ़तियों का धंधा भी पूरी तरह से प्रभावित हो गया। आढ़तियों ने कहा कि लाइसेंस तक रिन्यू नहीं किए जा रहे हैं, इस कारण आढ़तियों को कामकाज करने में दिक्कत आ रही है।
धान खरीद नहीं करेंगे राइस मिलर
जिला राइस मिलर एसोसिएशन के प्रधान सचिन मित्तल ने बताया कि आढ़तियों व किसानों की मांगें जायज हैं। राइस मिलर ने आढ़तियों की मांगों का समर्थन करते हुए मंडियों से धान की खरीद नहीं करेंगे। प्रदेशभर में 130 व कैथल जिले में सात अनाज मंडियां हैं।
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हड़ताल के चलते धान का सीजन होगा प्रभावित
आढ़तियों का कहना है कि जब तक मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा तब तक हड़ताल जारी रहेगी। वहीं इस हड़ताल के चलते धान का सीजन प्रभावित होगा। इस समय मंडियों में पीआर व 1509 धान की आवक हो रही है। धान की खरीद न होने पर किसानों को काफी परेशानी आएगी। अगर कटाई नहीं करेंगे तो खेतों में खड़ा धान प्रभावित होगा। ऐसे में किसान भी आढ़तियों की तरफ सड़कों पर उतर सकते हैं।
यह हैं आढ़तियों की मुख्य मांगें
-आढ़तियों की दामी पूरी 2.50 प्रतिशत मिलनी चाहिए।
-किसानों के माल की जो पेमेंट होनी है, वह किसान से पूछ कर आढ़तियों के माध्यम से या किसान के खाते में दी जाए।
-जो सरकार ई-नेम का नया पोर्टल शुरू करने जा रही है,यह एक जटिल प्रक्रिया है, यह मंडी के अंदर लागू नहीं की जा सकती, इसे तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए।
-सीमांत किसानों की फसल उनके आसपास की हरियाणा की मंडियों में बिकनी चाहिए।
-हरियाणा राज्य में एमएसपी से अलग बिकने वाले माल पर मार्केट फीस व एचआरडीएफ एक प्रतिशत होनी चाहिए।
-जो छोटे आढ़ती हैं वे मंडियों में दुकान नहीं ले सकते, दुकान चलाने के लिए एक पेटी व कंडे-बट्टे की जरूरत होती है, इसलिए एक दुकान पर चार से पांच लाइसेंस बनाने की अनुमति दी जाए।
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-मार्केट कमेटी लाइसेंस जीएसटी, लाइसेंस की तरफ होनी चाहिए, जो एक बार बनने के बाद लाइफटाइम चलता रहे।
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