कैथल के जिला नागरिक अस्पताल में बैठा कुत्ता।
कैथल। सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद भी शहर में लावारिस कुत्तों को पकड़ने का अभियान केवल फाइलों तक ही सिमट कर रह गया है। जिस एजेंसी को कुत्तों को पकड़ने और नसबंदी का जिम्मा सौंपा जाना था, वह कागजों में पहले से ही काली सूची में पाई गई है। इस तकनीकी खामी के कारण अब तक टेंडर प्रक्रिया सिरे नहीं चढ़ सकी है।
नगर परिषद द्वारा कराए गए पिछले सर्वे के अनुसार, शहर की गलियों और मोहल्लों में करीब 5,000 आवारा कुत्ते घूम रहे हैं। जबकि संख्या वास्तव में इससे अधिक है।
हैरानी की बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए महीनों बीत चुके हैं, लेकिन परिषद प्रशासन अब भी टेंडर-टेंडर का खेल खेल रहा है। अधिकारियों की इस लेटलतीफी का नतीजा यह है कि जिले के अस्पतालों में रोजाना कुत्ते काटने के औसतन 40 नए मामले दर्ज किए जा रहे हैं। बच्चे और बुजुर्ग घरों से बाहर निकलने में भी खौफ महसूस कर रहे हैं। संवाद