फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kaithal News: पाला बदलने का फिर भुगता खामियाजा

Thu, 28 Nov 2024 12:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
विज्ञापन
विज्ञापन
कमल बहल
विज्ञापन

कैथल। पहले जिला परिषद कैथल के अध्यक्ष और फिर सीवन ब्लॉक समिति और अब गुहला ब्लॉक समिति के अध्यक्ष को चुनाव के समय पार्टी बदलने का खामियाजा भुगतना पड़ा। इन तीनों ही अध्यक्षों को पाला बदलने के बाद कुर्सी से हटकर खामियाजा भुगतना पड़ा है।

गौरतलब है कि जिला परिषद और सीवन पंचायत समिति के बाद अब गुहला ब्लॉक समिति अध्यक्ष को पार्टी बदलने के चलते ही अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी है। विधानसभा चुनाव से पहले जहां जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव से पहले जजपा समर्थित थे। वहीं, सीवन और गुहला ब्लाक समिति अध्यक्ष भाजपा समर्थित थे। विधानसभा चुनाव के दौरान जिप अध्यक्ष सहित इन दोनों अध्यक्षों ने कांग्रेस का दामन थाम लिया था।
विज्ञापन


चुनाव में गुहला विधानसभा क्षेत्र के अधीन आने वाले सीवन और गुहला ब्लॉक समिति व कलायत विधानसभा में कांग्रेस के विधायक तो बने, लेकिन प्रदेश में सरकार न आने के चलते इन्हें नुकसान हुआ। एक तरफ जहां जिला परिषद अध्यक्ष दीपक मलिक उर्फ दीप जाखौली जजपा को छोड़ कांग्रेस समर्थित बने। वहीं, गुहला व सीवन में भी भाजपा को छोड़ कांग्रेस का दामन थामने वाले अध्यक्ष को भी चुनाव के बाद झटका लग गया है। सीवन ब्लाॅक समिति अध्यक्ष मनजीत कौर और अब गुहला की ब्लॉक समिति अध्यक्ष डिंपल रानी अपने पद से हट गई हैं।

गौरतलब है कि जिला परिषद अध्यक्ष के खिलाफ हुई अविश्वास प्रस्ताव की वोटिंग का परिणाम जारी होने से पहले ही साफ हो गया था दीपक मलिक उर्फ दीप जाखौली अध्यक्ष नहीं रहेंगे। दरअसल 20 में से 17 पार्षदों ने प्रस्ताव के लिए वोटिंग की थी। सभी वोट अध्यक्ष के खिलाफ पड़े थे। दीपक मलिक उर्फ दीप जाखौली विधानसभा चुनाव के दौरान ही कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए थे। अध्यक्ष के खिलाफ गत जुलाई में वोटिंग हुई थी। इसके बाद विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग गई। इसी वजह से उन्हे हटाने की कवायद थोड़ा लंबी चल गई थी।

लोकसभा चुनावों के बाद से जजपा समर्थित अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर उसे हटाने की रणनीति रची गई। जिसके चलते 12 जुलाई को भाजपा समर्थित 15 पार्षदों ने डीसी को अविश्वास का शपथ पत्र दिया था। संवाद
विज्ञापन


अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया तो मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव के लिए होने वाली वोटिंग पर रोक लगाने से इंकार कर दिया, परंतु चुनाव परिणाम घोषित करने के लिए उसके फैसले का इंतजार करने को कहा। कोर्ट ने इस पूरे मामले को लेकर सरकार से इसका जवाब मांगा था। जिला प्रशासन ने अब इस मामले में अपना जवाब पेश किया गया है, जिसमें अविश्वास को संवैधानिक व नियमों के मुताबिक बताया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें