संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। सरकार द्वारा जर्जर बसों को कैथल डिपो में भेजने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को पलवल के बाद अब रेवाड़ी से भी 10 जर्जर बसें कैथल डिपो पहुंचीं। इन बसों की हालत इतनी खराब है कि इन्हें रूट पर चलाना मुश्किल हो रहा है। कई बसों के शीशे टूटे हुए हैं, सीटें पूरी तरह फटी पड़ी हैं और कुछ सीटों का लोहे का ढांचा तक बाहर निकल आया है। ऐसे में यह बसें यात्रियों के लिए कितनी सुरक्षित और आरामदायक होंगी, यह एक बड़ा सवाल है।
पिछले साल नवंबर में बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए एनसीआर जिलों में ग्रैप लागू किया गया था, जिसके तहत बीएस-3 और बीएस-4 तकनीक की बसों का संचालन बंद कर दिया गया। इसके बाद इन जिलों से पुराने वाहनों को हटाकर अन्य जिलों में भेजा जाने लगा। इसी प्रक्रिया के तहत पिछले आठ महीनों में कैथल डिपो में कुल 70 जर्जर बसें शामिल हो चुकी हैं। वहीं, इसके बदले बीएस-6 तकनीक की 48 नई बसें एनसीआर जिलों को भेजी गई हैं।
इन बसों के आने से डिपो के बेड़े में संख्या बढ़कर 202 तो हो गई है, लेकिन लगातार खराबी और ब्रेकडाउन की वजह से रूटों पर समस्याएं और ज्यादा बढ़ गई हैं। ऐसे में बस खराब होने पर यात्रियों को बहुत दिक्कतें होती हैं।
बसों की खराब होने की समस्या है अधिक
एनसीआर जिलों से आ रही जर्जर बसों में सबसे अधिक समस्या उनका खराब होना है। सबसे अधिक ब्रेकडाउन की समस्या है। बीच रास्ते में बसों के बंद होने के कारण परिचालकों और चालकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सरकार को इस समस्या पर ध्यान देने की जरूरत है। -सुनील कुमार अलेवा, परिचालक।
बसों की खराब होने की समस्या है अधिक
ऐसा नहीं है कि एनसीआर से आ रही सभी बसें खराब हैं। जिन बसों में कुछ कमियां होती हैं, उनकी समय-समय पर मरम्मत कराई जाती है। रास्ते में ब्रेकडाउन की समस्या उतनी ज्यादा नहीं है। यात्रियों की सुविधा के लिए निरंतर बसों का रखरखाव किया जाता है।
-अनिल चोपड़ा, कार्यशाला प्रबंधक, कैथल डिपो
यात्रियों की परेशानी लगातार बढ़ रही
कैथल डिपो में लगातार आ रही जर्जर बसों के कारण यात्रियों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। सरकार को चाहिए तो यह था कि कैथल डिपों में बसों की संख्या बढ़ाने के लिए नई बसें भेजे, लेकिन स्थिति इसे उलट हो चुकी है। सरकार कैथल के साथ एक सौतेली मां जैसा व्यवहार कर रही है। सरकार से मांग है यात्रियों को रोडवेज कर्मियों की सुरक्षा के लिहाज से भी पुरानी की बजाय नई बसों को शामिल करें। - संदीप खटकड़ कैथल डिपो प्रधान हरियाणा रोडवेज जागृति मंच।