जिला बार एसोसिएशन व प्रशासन के बीच चल रहे गतिरोध के बीच सोमवार सुबह वकीलों ने क्रमिक अनशन शुरू कर दिया। बार एसोसिएशन भवन के निकट 8 वकीलों ने पहले दिन अनशन किया। उधर, डीसी ने डीआईपीआरओ को बातचीत के लिए भेजकर वीरवार 2 बजे का समय दिया। लेकिन वकीलों ने इस पहल को ठुकराते हुए कहा कि अधिकारियों के तबादले से कम कुछ भी मंजूर नहीं।
पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत सोमवार सुबह बार एसोसिएशन कार्यालय के निकट वकीलों ने क्रमिक अनशन शुरू कर दिया। पहले दिन सुरजीत धीमान, चन्द्रकांत रंगा, प्रेम छाबड़ा, रणधीर शर्मा, ओपी गुलाटी, अजय गर्ग, गौरव मित्तल, जानपाल ने अनशन किया। क्रमिक अनशन को संबोधित करते हुए एसोसिएशन के प्रधान अशोक गौतम ने कहा कि डीसी रवि प्रकाश गुुप्ता की हठधर्मिता के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है। डीसी द्वारा वकीलों के साथ बदले की कार्रवाई के तहत चैंबरों में बिजली विभाग के छापे डलवाए गए। हालांकि इनमें कुछ भी गलत नहीं पाया गया। दूसरी ओर बिजली विभाग ने भी पुष्टि की है कि एसडीएम आवास का मीटर बंद है। एडीसी का मीटर अंदर लगा हुआ है। गौतम ने कहा कि बड़े अफसोस की बात है कि अधिकारी स्वयं बिजली चोरी करने जैसा अपराध करते हैं और वकीलों के चेंबरों पर रेड डलवाते हैं। उनकी इसी प्रकार की हरकतों के कारण वकील ही नहीं जिले के अन्य लोग भी परेशान हैं। इन अधिकारियों को काम करने का अनुभव नहीं है। ये दोनों अधिकारी अदालतों का काम ठीक प्रकार से नहीं करते। जिससे आम जनता को न्याय नहीं मिल पाता।
गौतम ने कहा कि पूरे मामले की जानकारी बार काउंसिल ऑफ पंजाब एवं हरियाणा, उच्च न्यायालय, इंस्पेक्टिंग जज और मुख्यमंत्री को दे दी गई है। उन्होंने कहा कि इधर उन्हें पता चला है कि डीसी सरकार और उच्च अधिकारियों को झूठे तथ्य प्रस्तुत करके गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। जब तक डीसी और एसडीएम के ताबदले नहीं होते तब तक उनका धरना जारी रहेगा। यदि आवश्यकता हुई तो प्रदेश के अन्य जिलों में भी धरने प्रदर्शन की कॉल की जाएगी। इस मौके पर दिनेश त्यागी, संजीव गुप्ता, सुभाष चुघ, प्रदीप हरित, रणवीर पाराशर सहित सैकड़ों वकील उपस्थित थे।
डीसी ने भेजा बातचीत का न्योता, वकीलों ने ठुकराया
सोमवार को डीसी की ओर से जिला लोक संपर्क अधिकारी रणधीर शर्मा वकीलों के पास बातचीत का न्योता लेकर पहुंचे और उन्हें बताया कि डीसी वीरवार को 2 बजे इस मुद्दे पर बातचीत करेंगे। लेकिन वकीलों ने उनके प्रस्ताव को यह कहकर ठुकरा दिया कि अधिकारियों के तबादले के अलावा वे कोई बातचीत नहीं करेंगे। अशोक गौतम ने कहा कि यदि अधिकारी वकीलों से बात करना चाहें तो उन्हें स्वयं धरना स्थल पर आना होगा। उन्होंने कहा कि दोनों अधिकारियों के दुर्व्यवहार से बार के मान सम्मान को बहुत ठेस पहुंचा है।
नहीं किया दुर्व्यवहार : डीसी
डीसी रविप्रकाश गुप्ता ने कहा कि वे केवल बतौर डीसी कमिश्नर अंबाला मंडल के अधीनस्थ अधिकारी का काम कर रहे हैं। उन्हें किसी प्रकार की ईगो नहीं है, ना ही वे सुपरपॉवर हैं। वकील हों या जिले का कोई भी व्यक्ति, वे सभी से हर समय मिलने को तैयार हैं। उन्होंने किसी ने दुर्व्यवहार नहीं किया। वे केवल उस व्यक्ति को कार्यालय से बाहर जाने के लिए कहते हैं, जो उनके पास आकर जबरदस्ती काम करवाने करने का प्रयास करता है। चैंबर्स में पुलिस भेजने जैसे उन्होंने कोई आदेश नहीं दिए। वहां पुलिस सुरक्षा दृष्टि से गई थी। ना ही उन्होंने बिजली विभाग को छापे जैसी कोई बात कही। यहां 306 चैंबर हैं। लेकिन करीब-करीब आधे चैंबरों में बिजली मीटर लगे हैं। बिजली विभाग ने खुद संज्ञान लिया है। बार एसोसिएशन ने चैंबर निर्माण के लिए जगह देने को कहा था। जिसमें वर्ष 2002 का एग्रीमेंट देखा गया तो उसमें पाया कि वकीलों को चैंबर्स के लिए प्रति माह कुछ निश्चित किराया देना था। लेकिन यह किराया नहीं दिया जा रहा। उन्होंने महज एग्रीमेंट की जानकारी दी है। वे वकीलों का सम्मान करते हैं। देश को आजादी दिलवाने वाले अधिकतर नेता वकील थे।