संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। फसल अवशेष प्रबंधन के संदर्भ में कृषि विभाग के अधिकारियों व पुलिस प्रशासन ने जिले के कई गांवों में मंगलवार को फ्लैग मार्च निकाला। गांव प्यौदा, सिसला, सिसमौर, हरसौला, खेड़ी शेरू, जाखौली, देवबन, सांघन, तितरम, सारण व सेगा गांव के लोगों को पराली प्रबंधन के संबंध में जागरूक किया गया। इस फ्लैग मार्च की अगुवाई कृषि विभाग के उपमंडल अधिकारी कैथल सतीश नारा ने की।
उन्होंने लोगों को पराली प्रबंधन के बारे में पूर्ण जानकारी दी। धान अवशेष न जलाने के संबंध में अपील करन के साथ कृषि यंत्रों का उपयोग कर फसल अवशेषों का प्रबंध करने के बारे में जागरूक किया। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष जलाना सामाजिक बुराई ही नहीं, बल्कि कानूनी अपराध भी है। इससे प्रकृति, जमीन तथा मानव जीवन पर अत्यंत गंभीर व प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं, जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति नष्ट होने के साथ-साथ प्राकृतिक प्रदूषण की वजह से मनुष्य भी अनेक जानलेवा बीमारियों का शिकार होता है।
उन्होंने कहा कि किसान पराली जलाने से बिल्कुल परहेज करें। उन्होंने यह भी कहा कि अवशेष प्रबंधन कर सभी किसान एक सभ्य नागरिक होने का भी परिचय दें और समाज के प्रति अपनी सकारात्मक जिम्मेदारी निभाएं। फसल अवशेष प्रबंधन करने वाले किसानों को सरकार द्वारा प्रति एकड़ एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में दिए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी सूरत में किसान पराली ना जलाएं, बल्कि अवशेष प्रबंधन कर जमीन की उर्वरा शक्ति को बचाए रखें। उन्होंने बताया कि फ्लैग मार्च का वास्तविक संदेश यही है कि पराली जला कर किसान सिर्फ अपनी जमीन को ही बंजर नहीं बना रहे, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण की वजह से भविष्य में कैंसर, दमा इत्यादि जानलेवा बीमारियों को भी सीधा निमंत्रण दे रहे हैं। इस मौके पर बीईओ जगबीर लांबा भी मौजूद रहे।
फ्लैग मार्च निकालकर पराली न जलाने के लिए किया जागरूक
सीवन। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से फसल अवशेष प्रबंधन के तहत सीवन नगर सहित खंड के गांव फिरोजपुर, डोहर, कवारतन, रसूलपुर, ककहेडी, सैर, हरनौला व सौथा आदि में फ्लैग मार्च किया। इस अवसर पर विभाग के अधिकारियों के साथ पुलिस प्रशासन, खंड कार्यालय सीवन व तहसील कार्यालय सीवन के कर्मचारियों ने किसानों को पराली में आग न लगाने बारे जागरूक किया गया।
किसानों को बताया गया कि धान की फसल अवशेषों में आग लगाने से पर्यावरण प्रदूषित होने के साथ-साथ जमीन में आवश्यक पोषक तत्वों का नुकसान होता है। फसल अवशेषों को आग न लगाकर खेत में मिलाएं, जिसकी भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी। सहायक पौधा सरंक्षण अधिकारी डा. कुलदीप सिंह ने बताया कि यदि किसान अपने धान की पराली का कृषि यंत्र द्वारा पराली प्रबंधन करवाए तो उस किसान को प्रति एकड़ एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
जो किसान पराली में आग लगा रहे हैं उन पर प्राथमिकी भी दर्ज की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसान पराली में आग न लगाए तथा आग लगाने पर प्रशासन द्वार की जाने वाली कार्रवाई से भी बचें। इस मौके पर डा. लोचन कौशिक, गुरजीत सिंह व अभिषेक शर्मा, कृषि पर्यवेक्षक आदि मौजूद रहे। संवाद