संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिला प्रशासन ने जिले में पंजीकृत सभी प्रिंटिंग प्रेस को चुनाव पम्पलेट, पोस्टर और संबंधित सामग्री की छपाई और प्रकाशन के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए हैं। यह जानकारी जिला निर्वाचन अधिकारी एवं डीसी डॉ. विवेक भारती ने दी है।
डीसी ने सभी पंजीकृत मुद्रकों और प्रकाशकों को नोटिस जारी किया, जिसमें बताया गया कि चुनाव पंफलेट, पोस्टर आदि की छपाई और प्रकाशन प्रतिनिधित्व की धारा 127-ए के प्रावधानों की ओर से नियंत्रित किया जा रहा है। डीसी ने कहा कि प्रिंटिंग प्रेस मालिक बिना जांच पड़ताल व नियमों के विरुद्ध जाकर कोई भी चुनाव प्रचार सामग्री प्रकाशित न करें। चुनाव के दौरान मुद्रक व प्रकाशक के नाम के पंफलेट व पोस्टर छापना जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 की धारा 127 ए का उल्लंघन है और ऐसा करने वाले प्रिंटर के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसमें छह महीने की सजा से लेकर प्रिंटिंग प्रेस का लाइसेंस निरस्त करने का प्रावधान है।
डीसी ने कहा कि चुनाव से संबंधित हर सामग्री पर मुद्रक व प्रकाशक का नाम अवश्य छापें। कहा कि चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों के खर्च की सीमा निर्धारित की हुई है। इसलिए यह जरूरी है कि उनके पंफलेट व पोस्टर आदि के खर्च का भी पूरा हिसाब किताब रहे। उन्होंने बताया कि विधानसभा चुनाव से संबंधित पंफलेट व पोस्टर आदि उसी स्थिति में छापें जब सामग्री छपवाने वाला व्यक्ति हलफनामे के साथ दो गवाह दें और उनके हस्ताक्षर भी लेने जरूरी हैं।
ऐसे पोस्टर व पंफलेट आदि छापने के बाद उनकी एक कॉपी जिला मजिस्ट्रेट को भेजनी होगी और राज्य स्तर पर मुख्य चुनाव अधिकारी को कॉपी भेजकर यह बताना होगा कि अमुक व्यक्ति ने चुनाव से संबंधित कितनी संख्या में पोस्टर अथवा पंफलेट छपवाएं हैं और उनके खर्च का भी विवरण देना होगा। कॉपी से कॉपी करना भी इसी श्रेणी में आता है। चुनाव पंफलेट व पोस्टर का अर्थ प्रचार के लिए प्रयोग किए जाने वाले उन सभी दस्तावेजों से है, जिनमें किसी भी चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार से संबंधित प्रचार की जानकारी हो।