कैथल। जिला कैथल के 30 स्कूलों की छात्र-छात्राएं चार दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण कर कैथल लौट आए। इसमें कक्षा 11वीं के कला संकाय के 100 छात्र और छात्राओं ने भाग लिया। भ्रमण के आकर्षण का केंद्र रहा जंगे आजादी म्यूजियम करतारपुर जहां बच्चों ने आजादी के लंबे संघर्ष का जीवंत दर्शन किया।
राजनीतिक विज्ञान की अध्यापिका नीलम कौशिक व कविता रानी ने सभी बच्चों को आजादी के संघर्ष की कहानी साथ साथ बताई, जिससे बच्चों को विशेष जानकारी प्राप्त हुई और विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। आरोही मॉडल स्कूल रामगढ़ पांडवा के आदित्य ने बताया कि वह पहली बार अपने शहर से बाहर गया और अटारी बॉर्डर को देखकर उनको बहुत अच्छा लगा। वह अपने अभिभावकों का धन्यवाद करना चाहता हैं कि उन्होंने मुझे भ्रमण पर भेजा।
चोशाला स्कूल की मुस्कान ने कहा कि अटारी बॉर्डर पर विदेशी मेहमानों का भारत के प्रति सम्मान देखकर बहुत अच्छा लगा। उन्होंने पहली बार शहरी दुनिया को देखा तथा वह अब तक पहले कभी नहीं गई थी। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जखोली अड्डा कैथल से प्रिया ने कहा कि एयर कंडीशन बस में बैठने का यह मेरा पहला अवसर था, जो मुझे बहुत ही अच्छा लगा।
सजुमा स्कूल से छात्र देवी ने कहा कि यह मेरा पहला अनुभव था कि मैं अपने गांव से बाहर गई हूं। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कैथल के छात्र तरुण व ध्रुव ने कहा कि पहली बार सांझा खाने का अनुभव हुआ। अध्यापकों ने इतना अकेलापन महसूस नहीं होने दिया। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बलबेड़ा की छात्रा प्रीति व स्नेहा ने कहा कि जलियांवाला बाग को प्रत्यक्ष रूप से देखकर जो हमने अब तक पढ़ा था, उसकी याद ताजा हो गई। जो हमारे लिए कभी न भूलने वाले संस्मरण बन गए हैं। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जाखौली से आई छात्रा कीर्ति ने कहा कि जिनके बारे में हम पढ़ते आएं हैं, वह चीजें देखकर बहुत अच्छा अनुभव हुआ।
भ्रमण के नोडल अधिकारी सुशील कुमार ने बताया कि इस भ्रमण पर सबसे पहले विद्यार्थियों को भारत पाक सीमा बॉर्डर की बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी दिखाई गई। इस सेरेमनी को देखकर बच्चे देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत हो गए। बीएसएफ द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति कार्यक्रम देखने का अनुभव शानदार हजारों लोगों की भीड़ देशभक्ति नारे लगा रही थी, जिससे सभी में जोश भर गया। उन्होंने कहा कि इसके बाद आजादी की लड़ाई के संघर्ष के जीवंत उदाहरण जलियांवाला बाग को बच्चों ने देखा, जिसमें बच्चों ने अंग्रेजों की बर्बरता भरे गोलियों के निशान को जीवंत रूप में देखकर बच्चे भावुक हो गए।
एपीसी कुशल कुमार ने बताया कि इस शैक्षणिक भ्रमण से बच्चों के मानस पटल पर सदा सदा के लिए एक अमिट छाप रहेगी, क्योंकि कुछ बच्चों के अनुभव बहुत अच्छे रहे। इस अवसर पर डीएमएस सुशील कुमार, एपीसी कुशल कुमार, प्राध्यापक सतबीर सिंह, सुभाष चंद्र, विनोद कुमार, सुरेश गुहना, अनीता, कविता रानी नीलम कौशिक व मुकेश रानी मौजूद रहे।