संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिला परिषद में हुए सात करोड़ रुपये के सफाई घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम को आरोपियों की ओर से गबन किए गए रुपयों से प्रॉपर्टी बनाने का शक है। ऐसे में एसीबी की टीम ने कैथल सहित जींद और कुरुक्षेत्र के राजस्व विभाग से भी अब तक गिरफ्तार किए गए आरोपियों की प्रॉपर्टी की जानकारी जुटाना शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि एसीबी इस मामले में अधिकारी नवीन की ओर से कैथल में खरीदी गई प्रॉपर्टी को अटैच कर चुकी है। यह प्रॉपर्टी करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये की बताई जा रही है।
वहीं, अब एसीबी बचे हुए आरोपियों की प्रॉपर्टी की जानकारी लेकर प्रॉपर्टी अटैच करेगी। इस मामले में कुछ समय पहले ही तीन जिलों के जिला राजस्व अधिकारी को पत्र लिखकर सभी आरोपियों की प्रॉपर्टी का विवरण मांगा था। विभाग ने जिला परिषद से तो रिकॉर्ड लेकर न्यायालय में जमा करवा दिया है लेकिन अभी राजस्व विभाग से प्रॉपर्टी की जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाई है।
आरोपियों की प्रॉपर्टी को अटैच करके सरकार को हुए नुकसान की भरपाई की जाएगी। इससे पहले एसीबी की टीम जिला परिषद से भी आरोपियों के समय का करीब 2200 पेज का रिकॉर्ड कब्जे में लिया था। आरोपियों ने सफाई घोटाले को लेकर 151 गांव में सफाई के नाम पर फर्जी बिल बनाए थे। फर्म ठेकेदारों के साथ मिलकर गांव में सफाई का फर्जी कार्य दिखाते हुए यह राशि हड़प ली थी। इसमें करीब 450 लोगों के बयान भी दर्ज किए गए हैं।
अभी सात आरोपी हैं गिरफ्त से बाहर
जिला परिषद घोटाला में अभी तक सात आरोपी एसीबी की गिरफ्त से बाहर हैं। इसमें अभी तक मुख्य आरोपी डिप्टी सीईओ जसविंद्र सिंह, कमलजीत व सुमित व भाजपा नेता प्रवीण सरदाना के ठिकानों पर रेड की लेकिन अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। आरोपियों के परिजनों से भी टीम कई बार पूछताछ कर चुकी है, लेकिन अभी तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। अब तक एक एसडीओ, जेई, क्लर्क सहित पांच ठेकेदारों को गिरफ्तार किया जा चुका है।