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सड़क हादसे में घायल युवक की समय पर इलाज न मिलने से मौत

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चिकित्सीय सेवाओं में तमाम सुधार के दावों के बीच एक बीस साल के युवक की चीका के सरकारी अस्पताल की अव्यवस्थाओं के कारण पटियाला ले जाते समय मौत हो गई। यहां एंबुलेंस में तेल नहीं था, इलाज के लिए डॉक्टर भी समय से नहीं पहुंचे। महज फर्स्ट एड देने में ही एक घंटा खराब हो गया। जिस कारण सिर में लगी चोट के चले युवक को बचाया नहीं जा सका।
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खराल निवासी रघुबीर ने बताया कि 31 दिसंबर की रात्रि में पटियाला रोड पर एक सड़क दुर्घटना में बाइक पर सवार उसके बेटे बीस साल के गुरप्रीत को सिर में गहरी चोटें आईं। उसे लेकर लोग सरकारी अस्पताल गुहला पहुंचे। जहां समय पर डॉक्टर नहीं पहुंच पाए। एसएमओ गुहला से जब संपर्क किया गया उसके बाद संबंधित डॉक्टर वहां पहुंचे लेकिन हैरानी तो तब हुई जब सरकारी एंबुलेंस बुलाई गई तो 20 मिनट में सरकारी एंबुलेंस आई और एंबुलेंस के ड्राइवर ने कहा कि इमरजेंसी के लिए उनके पास 20 लीटर से ज्यादा तेल नहीं है जिस वजह से एंबुलेंस चंडीगढ़ नहीं जा पाएगी। ड्राइवर की बात जब एसएमओ से करवाई गई तो एसएमओ डॉ. संजीव गोयल ने ड्राइवर को व्यवस्था सही रखने के लिए खूब लताड़ लगाई और मरीज की हालत को देखते हुए अपनी जेब से डीजल की व्यवस्था करने के आदेश दिए। ड्राइवर ने इस दौरान हवाला दिया की एंबुलेंस में विशेष किस्म का तेल डलता है जो कैथल हेडक्वार्टर से ही डलता है। इस दौरान समाजसेवी नोदी चीका भी मौके पर पहुंच गए और घायल की हालत को देखते हुए अटेंडेंट से कहने लगे कि मरीज को जितना जल्दी हो सके फस्र्ट एड दी जाए और डॉक्टर को बुलाया जाए, लेकिन मरीज को पटियाला रेफर करते-करते ही एंबुलेंस की तेल की समस्या व अन्य कागजी कार्रवाई में एक घंटा लग गया। जिस कारण पटियाला के लिए उसे लेकर चले ही थे कि उसकी मौत हो गई।
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इलाज के लिए देरी से पहुंचे डॉक्टर ने कहा कि वह खाना खाने गए हुए थे और एक इमरजेंसी अटेंड करके गए थे, इस वजह से थोड़ा लेट हो गए।
इस संबंध में एसएमओ संजीव गोयल ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी, जो भी कमी होगी, उसकी जिसकी भी जिम्मेवारी तय होगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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