संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। कलायत खंड में कैटल शेड निर्माण करने की योजना तीन वर्षों से जांच के घेरे मेंं है। इस मामले में न तो जांच टीम अधिकारियों को क्लीन चिट दे पा रही है और न ही कार्रवाई की जा रही है। इस गंभीर मामले की जांच के लिए मंगलवार को एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम चंडीगढ़ से कलायत पहुंची। टीम का नेतृत्व अधिकारी रमेश वर्मा ने किया।
उन्होंने काफी समय पंचायती राज विभाग के एसडीओ प्रदीप कुमार और दूसरे अधिकारियों की मौजूदगी मेंं कैटल शेडों से जुड़े रिकॉर्ड की छानबीन की। बंद कमरे मेंं चली जांच के दौरान बीडीपीओ कार्यालय के साथ-साथ खंड की पंचायतों में हड़कंप मचा रहा। बाद में टीम निर्माण योजना की जांच के लिए कौलेखां और बालू गांव में पहुंची।
प्राप्त जानकारी अनुसार, एसीबी के पास अलग-अलग माध्यमों से पशु कैटल शेड निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार की शिकायत पहुंची है। इसके अनुरूप जांच प्रणाली जारी है। गांव बालू के आरटीआई कार्यकर्ता गुरदेव सिंह और राजू बालू निरंतर कलायत खंड में कैटल शेड निर्माण योजना के नाम पर भ्रष्टाचार की शिकायत विभिन्न स्तरों पर करते आए हैं। इनका आरोप है कि सरकार की नीति के अनुसार प्रत्येक पात्र को 60 हजार रुपये की सहायता राशि मिलनी थी, लेकिन अधिकारियों ने धरातल पर कैटल शेडों के निर्माण करने की बजाय कागजों में फर्जी बिलों से भुगतान किए गए हैं।
ये भी आरोप लगाते हुए कहा कि योजना कार्य मेंं निर्माण सामग्री के जो बिल दर्शाए गए हैं, वे अधिकांश जींद के उप मंडल नरवाना व अन्य इलाकों के हैं। यह बात समझ से परे है कि गांवों के लोग अपने कलायत शहर की बजाय दूर-दराज के शहरों में भारी भरकम यातायात खर्च करते हुए निर्माण सामग्री क्यों खरीदेंगे। जबकि स्थानीय स्तर पर ही यह निर्माण सामग्री उपलब्ध है। उन्होंने बिल जारी करने वाले दुकानदारों और भुगतान करने वाले अधिकारियों की सिरे से जांच करने की मांग की। इस मामले की जांच एसडीएम स्तर पर भी शुरू हुई थी। इसमें अधिकारी किस
निष्कर्ष पर पहुंचे इसका खुलासा नहीं किया जा रहा है।
अधिकारी रमेश वर्मा ने बताया कि फिलहाल कैटल शेड निर्माण योजना के संबंध में दी गई शिकायत के आधार पर जांच जारी है। इसको लेकर हर पहलु पर योजना कार्य को परखा जा रहा है। जांच मेंं जिस प्रकार के तथ्य सामने आएंगे उसके अनुसार कार्यवाही होगी।
गौरतलब है कि पशु शेड योजना में भुगतान के लिए जिन बिलों का इस्तेमाल किया वे उचाना, नरवाना और दूरदराज के अन्य इलाकों से जारी बताए गए थे। समाजसेवी संगठनों का कहना था कि सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिरकार किन कारणों के चलते कलायत के बजाय दूरदराज से निर्माण सामग्री खरीदने की पशु शेड की जरूरत पड़ी।