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ढाई साल ब्रेन ट्यूमर से जूझ रही शकुंतला देवी के लिए वरदान साबित हुई आयुष्मान भारत योजना

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aayushmaan bharat yojna - फोटो : Kaithal
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पिछले ढाई साल ब्रेन ट्यूमर से जूझ रही शकुंतला देवी के लिए आयुष्मान भारत योजना वरदान साबित हुई है। प्रदेश के बड़े से बड़े अस्पताल में जब सुभाष नगर, देवीगड़ रोड पुराना बाईपास निवासी 48 वर्षीय शकुंतला देवी को इलाज नहीं मिल सका तो उसके परिवार ने बीमारी को मात देने के लिए आयुष्मान योजना का सहारा लिया। योजना के तहत इलाज होने का परिणाम ये रहा कि आज शकुंतला देवी स्वस्थ हैं और अपने परिवार के साथ हंसी खुशी से जीवन जी रही हैं।
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शकुंतला देवी के पुत्र कुलदीप कुमार ने बताया कि करीब ढाई वर्ष पहले उनकी मां को दौरे पड़ने शुरू हु थे। पहले उन्होंने शहर के लोकल डॉक्टरों से इलाज करवाया। जब यहां से दवाइयां लेने के बाद भी कोई आराम नहीं मिला तो उन्होंने बड़े अस्पताल में अपनी मां का इलाज करवाने की ठानी। एक तो परिवार गरीब और ऊपर से इलाज के भारी भरकम खर्चे का डर, उसके बाद भी पूर्ण स्वास्थ्य मिलेगा या नहीं, इन सब बातों को एक तरफ छोड़कर वह अपनी मां को चंडीगढ़ और रोहतक के पीजीआई में लेकर गया। दोनों जगहों पर डॉक्टरों ने जांच पड़ताल के बाद उन्हें ब्रेन ट्यूमर की बीमारी बताई। कुलदीप ने बताया कि वहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन के दौरान जान का खतरा बताते हुए मना कर दिया। साथ ही प्राइवेट अस्पतालों में ऑपरेशन का खर्च 5 से 7 लाख रुपये तक बताया गया। जिसे करवाने के लिए उनके पास रुपये नहीं थे।
बाद में वह अपनी मां को शहर के ही सिग्रस अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज के लिए लेकर गया। डॉक्टरों की सलाह के अनुसार पहले उसने अपनी मां का एमआरआई टेस्ट करवाया। उसके बाद डॉक्टरों ने उसे अस्पताल में दाखिल कर सात जुलाई को ऑपरेशन किया। जो पूरी तरह से सफल रहा।
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पांच से छह लाख तक बाहर के डॉक्टरों ने बताया था खर्चा: कुलदीप ने बताया कि आमतौर पर पूछताछ में डॉक्टरों ने उसे पांच से छह लाख रुपये के बीच खर्चा बताया था। उसके बाद भी ऑपेरशन सफल होने की कोई गारंटी नहीं थी। इससे पहले भी वह जैसे-तैसे इलाज पर करीब दो लाख रुपये खर्च कर चुका था। कुलदीप ने कहा कि उनकी परिवार गरीब है। उसके पिता भीरा राम और वह खुद मजदूरी करके घर का खर्चा चलाते हैं। ऑपरेशन में उनका कोई खर्च नहीं आया। उन्होंने बस खून दिया था। अगर आयुष्मान योजना का लाभ नहीं मिलता तो शायद उसकी माता का इलाज नहीं हो पाता। उसने बताया कि परिवार में उसके माता पिता के अलावा उसकी पत्नी, बच्चे, और एक बहन भी है। उसने जिलावासियों से भी आह्वान किया कि वे जरूरत पड़ने पर इस योजना का लाभ उठाएं।
लोगों ने रखी समस्याएं, डॉक्टर ने दिए जवाब: उधर, अमर उजाला की आयुष्मान योजना मुहीम के तहत हाबड़ी गांव के रहने वाले सतबीर ने पूछा कि आयुष्मान योजना में पत्नी नीलम का कार्ड बनवाना है और ये कहा बनेगा।
इस सवाल पर जिला नोडल अधिकारी डा. संदीप जैन ने कहा कि इस व्यक्ति को यह साबित करना पड़ेगा कि वह उसकी पत्नी है। वह वैध कागजात दिखा दें। उसे केस बनाकर विभाग को भेज दिया जाएगा। इसके बाद उसका कार्ड बन जाएगा।
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चीका मंडी निवासी व्यक्ति पवन कुमार ने पूछा कि आईवीएफ तकनीक की सुविधा भी आयुष्मान योजना में है।
इस सवाल पर जिला नोडल अधिकारी डा. संदीप जैन का कहना है कि आईवीएफ तकनीक का नहीं है अभी इस योजना में लाभ।
कैथल निवासी सुरेंद्र कुमार ने पूछा कि वह कार्ड कहां बनवाए? उसे काफी दिक्कत हो रही है।
डा. संदीप गोयल का कहना है कि सरकारी अस्पताल सहित शहर में जो पांच अस्पताल पैनल पर हैं। वहां जाकर इलाज करवा सकते हैं।
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