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Kaithal News: मंडी में आढ़ती की कच्ची पर्ची पर पक्का खेल

Thu, 23 Oct 2025 01:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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22kht_5  किसान को दी गई कम रेट की कच्ची पर्ची। सौ किसान
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नरेंद्र पंडित
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कैथल। अनाज मंडियों में किसानों के साथ योजनाबद्ध तरीके से ठगी का खेल खेला जा रहा है। कच्ची पर्ची पर आढ़ती, राइस मिलर और सरकारी खरीद एजेंसियों की साठगांठ से किसानों की पीआर धान एमएसपी से कम रेट पर खरीदी जा रही है, जबकि बाद में उसी धान को सरकारी समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर चढ़ाने की आशंका जताई जा रही है।

शिकायत के अनुसार, कई आढ़ती किसानों को पक्की पर्ची की जगह कच्ची पर्ची थमा रहे हैं, जिसमें धान की तौल और कम रेट लिखा होता है। उदाहरण के तौर पर, यदि धान 2200 रुपये प्रति क्विंटल में खरीदी जाती है, तो किसानों से कहा जाता है कि तय एमएसपी 2369 रुपये तक का अंतर बाद में वापस करना होगा।
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किसान मजबूरी में आढ़तियों की बात मान रहे हैं, क्योंकि उनके साथ सालभर का लेनदेन चलता है। इस पूरे खेल में राइस मिलर और खरीद एजेंसी की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। खरीद प्रक्रिया इन्हीं एजेंसियों के माध्यम से होती है और राइस मिलर इन्हीं के जरिए किसानों की फसल खरीदते हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार अपराह्न 3 बजे तक जिले की विभिन्न मंडियों में 8,28,625 मीट्रिक टन धान की आवक दर्ज की गई, जिनमें से 7,94,205 मीट्रिक टन की खरीद हो चुकी है। संवाद

किसानों की पीड़ा
वापस करने होंगे रुपये

गांव क्योड़क निवासी जयभगवान ने बताया कि उन्होंने कैथल मंडी में पीआर धान 2040 रुपये प्रति क्विंटल में बेची। आढ़ती ने कहा कि जब एमएसपी दर से भुगतान आएगा तो उससे ऊपर के रुपये वापस करने होंगे।

22 सौ रुपये क्विंटल बेची

चरणजीत बाजवा, चीका मंडी, ने बताया कि उन्होंने धान 2200 रुपये प्रति क्विंटल में बेची। आढ़ती केवल कच्ची पर्ची देते हैं और बाकी पैसे बाद में लौटाने को कहते हैं। किसान मजबूरी में यह सब सहने को विवश हैं।

इस तरह समझें खेल
मंडियों में आढ़ती किसानों की फसल बिकवाने का कार्य करते हैं। सरकारी खरीद एजेंसियां - खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, हैफेड और वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन - धान की खरीद करवाती हैं, जबकि खरीद के लिए राइस मिलर मंडियों में पहुंचते हैं।

सूत्रों के अनुसार, किसानों की फसल में नमी अधिक दिखाकर या गुणवत्ता पर सवाल उठाकर कम रेट में खरीद की जाती है। बाद में एजेंसी अधिकारियों की मिलीभगत से यही धान एमएसपी रेट पर सरकारी खाते में चढ़ाकर मुनाफा कमाया जाता है। धान बिक्री की पूरी राशि किसानों के खाते में जाती है, लेकिन बाद में आढ़ती उनसे ऊपर के रुपये वापस मांगते हैं। इस साठगांठ से किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है, जबकि कागजों में सरकार के रिकॉर्ड में पूरी खरीद एमएसपी पर दर्शाई जाती है।
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मंडियों की स्थिति (अपराह्न 3 बजे तक)
मंडी
आवक (एमटी)
खरीद (एमटी)

अमोली 8017
6591

भागल
2917
2682

चीका
2,89,057
2,74,507

ढांड
1,41,071
1,33,522

धनौरी
2798
2715

विस्तार अनाज मंडी
84148
82,591

कलायत 14,540
13,146

कौल
12,596
1,1348

नई अनाज मंडी
99463
98,216

पुरानी अनाज मंडी
8088
8033

पाई
11,695
11,338

पूंडरी 88,826
85,975

राजौंद 12,727
11,841

रामथली 28,809
28,309

सीवन
23,884
23,696

धान की फसल के पूरे रुपये सीधे किसान के खाते में आते हैं। यदि कोई आढ़ती किसान से रुपये वापस मांगता है तो यह पूर्णतः गलत है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे लिखित शिकायत करें। संबंधित आढ़ती या एजेंसी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। -नरेंद्र ढुल, सचिव- मार्केट कमेटी

22kht_5  किसान को दी गई कम रेट की कच्ची पर्ची। सौ किसान

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