फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kaithal News: श्री कपिल मुनि तीर्थ में पौष पूर्णिमा को लगा मेला

Sun, 04 Jan 2026 01:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

कलायत। श्री कपिल मुनि तीर्थ पर शनिवार को पौष माह की पूर्णिमा का मेला श्रद्धा, आस्था और धार्मिक उल्लास के साथ धूमधाम से संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पवित्र कपिल तीर्थ में आस्था की डुबकी लगाकर अपने इष्टदेव का स्मरण किया और अध्र्य अर्पित किया। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में स्थापित सभी विग्रहों की विधिवत पूजा-अर्चना की तथा पौष पूर्णिमा की कथा का श्रवण किया।

मंदिर के पुजारी अनिरुद्ध गौतम ने श्रद्धालुओं को पौष पूर्णिमा कथा सुनाते हुए कहा कि पूर्णिमा के दिन कपिल तीर्थ में स्नान कर कथा श्रवण करने से जो पुण्य फल प्राप्त होता है, उसका पूर्ण व्याख्यान संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि पवित्र तीर्थ में डुबकी लगाने मात्र से ही अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है तथा घर में धन-धान्य की वृद्धि के साथ सुख-शांति की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि पूर्णिमा का व्रत पूर्ण व्रत होता है, जिसमें सांयकाल के समय ही व्रत का पारण किया जाता है।
विज्ञापन


अनिरुद्ध गौतम ने बताया कि पौष पूर्णिमा के साथ ही माघ माह का शुभारंभ हो गया है। माघ माह के दौरान श्री कपिल मुनि मंदिर में नगर व क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि, पशुधन की वृद्धि, विद्या प्राप्ति और रोगों से मुक्ति के लिए प्रतिदिन पूजा-अर्चना के साथ रूद्र महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। एक माह तक चलने वाले इस यज्ञ में नवग्रहों के निमित्त विशेष आहुतियां डाली जाएंगी।

उन्होंने बताया कि दूध की आहुति से पुत्र रत्न की प्राप्ति, पशुधन में वृद्धि और सुख-शांति मिलती है, शहद की आहुति से राजसत्ता एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है, जबकि तेल की आहुति से शत्रु नाश के साथ राहु, केतु और मंगल ग्रह की शांति होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से माघ माह के दौरान पवित्र कपिल तीर्थ में स्नान कर यज्ञ में आहुति डालकर पुण्य लाभ अर्जित करने का आह्वान किया।
विज्ञापन


उधर, कड़ाके की सर्दी के बावजूद मेला परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रह। मंदिर परिसर में बिट्टू शर्मा परिवार की ओर से भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें मंदिर व तीर्थ पर पहुंचे सभी श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। वहीं मंदिर के मुख्य द्वार पर अस्थायी रूप से दर्जनों दुकानें सजी रहीं। इन दुकानों पर प्रसाद, फल-फ्रूट के अलावा बच्चों के लिए तरह-तरह के खेल-खिलौने उपलब्ध थे। दुकानों पर खरीदारी के लिए महिलाओं और बच्चों की खासी भीड़ देखने को मिली, जिससे मेले का माहौल और अधिक जीवंत हो गया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें