कलायत। प्राचीन कपिल मुनि सरोवर तट पर अब हर शाम को तीर्थ आरती होगी। करीब 100 वर्ष के बाद यह परंपरा फिर से शुरू होने जा रही है। इस धरोहर का इतिहास रामायण व महाभारत सहित विभिन्न गौरवशाली कालों से जुड़ा है। सरोवर तट पर स्थित मंदिरोंं की शृंखला देश की सांझी विरासत का अनूठा प्रमाण है। इस प्रकार के बड़े सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए श्री कपिल मुनि तीर्थ कमेटी ने हरिद्वार की प्रसिद्ध हर की पौड़ी की तर्ज पर नियमित संध्या आरती शुरू करने का निर्णय लिया है।
इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के साथ-साथ लोगों को अपनी परंपराओं से जोड़ना है जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिले और क्षेत्र के लोगों के लिए स्वरोजगार के अवसर मजबूत हों। श्री कपिल मुनि तीर्थ कमेटी के अध्यक्ष राजू कौशिक की अगुवाई में इस परंपरा के लिए विभिन्न संगठनों की बैठकोंं का सिलसिला पिछले कुछ समय से जारी था। इसके तहत नगर पालिका पार्षदों, विश्व हिंदू परिषद, क्षेत्र के विभिन्न धार्मिक संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं व आम लोगों से विरासत को सहेजने की अपील की जा रही थी।
भगवान कपिल मुनि मंदिर के पुजारी संजय शास्त्री व अनिरुद्ध गौतम प्रतिदिन संध्या आरती का संचालन कर धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करेंगे। आरती को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए क्षेत्र के बुजुर्गों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों से इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की जा रही है।
श्रद्धालुओं का मानना है कि सामूहिक सहभागिता से धार्मिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी। क्षेत्र में सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का भी विस्तार होगा। तीर्थ कमेटी प्रधान राजू कौशिक ने बताया कि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और विकास के लिए जनसहभागिता बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लोगों के सहयोग से तीर्थ स्थल पर निर्माण, विकास और सौंदर्यीकरण के कार्यों को गति मिलेगी। साथ ही धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने में भी यह पहल मील का पत्थर साबित होगी।
इसको ध्यान में रखते हुए भारत की गौरवशाली धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने और कपिल मुनि तीर्थ को एक प्रमुख आध्यात्मिक व पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया गया। नियमित संध्या आरती की शुरुआत को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
तीर्थों व सरस्वती नदी के विकास के लिए सरकार प्रयासरत : धुम्मन
हरियाणा सरस्वती बोर्ड के वाइस चेयरमैन धुम्मन सिंह किरमच ने बताया कि प्राचीन कपिल मुनि तीर्थ के साथ-साथ कुरुक्षेत्र की परिधि में आने वाले स्थलों को विकसित करने के लिए केंद्र व राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जिस प्रकार तीर्थों व सरस्वती नदी के विकास के लिए काम कर रहे हैं, उससे सांस्कृतिक विरासत सुदृढ़ होगी। सीएम की अपील को ध्यान में रखते हुए जिस प्रकार कलायत कपिल तीर्थ पर संध्या आरती की शुरुआत की गई है, वह प्रशंसनीय है।
कलायत के प्राचीन कपिल मुनि सरोवर तट पर संध्या तीर्थ आरती में शामिल श्रद्धालु।