संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। गांव भानपुरा के किसान विजयपाल के खेत में खड़ा 98 साल का पीपल का वृक्ष अपनी पेंशन की बाट जोह रहा है। हालांकि विभाग ने उसकी पूरी जानकारी लिखकर पत्थर वृक्ष के पास लगा दिया लेकिन इसके बावजूद अभी तक विभाग की ओर से इस वृक्ष की सरकारी पेंशन शुरू नहीं हो सकी है।
गौरतलब है कि सरकार ने नवंबर 2023 में प्राण वायु देवता के नाम पर 75 वर्षों के ऊपर के पीपल के वृक्षों की पेंशन शुरु करने की योजना बनाई है। इसके आधार पर विभाग की ओर से सर्वे किया और जो वृक्ष वास्तव में पेंशन के हकदार पाए, उसकी पेंशन मालिक को देने का प्रावधान किया, ताकि उसका रख-रखाव सही ढ़ंग से हो सके। विजयपाल का कहना है कि उसके खेत में खड़े पीपल के वृक्ष की पेंशन शुरू करवाने के लिए वह वन विभाग कैथल के कार्यालय में कई महीने से चक्कर काट रहा है, लेकिन अधिकारी उनको कहते हैं कि पंचकूला मुख्यालय से शुरू होगी और उन्हें पंचकूला जाना पड़ेगा। उसने सभी कागजात भी पूरे जमा करवा दिए, लेकिन अधिकारी उसको सही रास्ता नहीं बता रहे। इस समस्या को लेकर वह समाधान शिविर में भी गया था, जहां एडीसी ने उसके वृक्ष के कागजात विभाग को थमा दिए, लेकिन अभी तक समाधान नहीं निकला है। सरकार की योजनाओं का लाभ लाभार्थियों तक नहीं पहुंच रहा।
पहली बार करनाल में मिली थी
क्या आप जानते हैं कि करनाल में 120 पेड़ों को पहली पेंशन दी गई थी। प्राण वायु देवता योजना के तहत तब पेड़ों को पेंशन देने वाला पहला राज्य हरियाणा बना था। प्रदेश सरकार के आदेश अनुसार करनाल में 120 पेड़ों को पहली पेंशन दी गई थी। पेंशन योजना में सबसे ज्यादा पेंशन लेने में काछवा व गोली गांव ने मारी है। यहां सात-सात पेड़ मिले थे। लोगों ने कहा कि पुराने पेड़ों को संरक्षित रखने के लिए यह अच्छी पहल है।