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अधिकारियों के मौखिक आदेश--डॉक्टर टेस्ट कम लिखो...ताकि हड़ताल के कारण लैब में परेशानी ना हो

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एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल के कारण जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल, अधिकारियों ने डॉक्टरों को दिए मौखिक आदेश
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टेस्ट कम लिखो, ताकि लैब में न हो परेशानी
- लैब में एक अटेंडेंट की ड्यूटी, चार शिफ्टों में एक-एक लैब अटेंडेंट से चलाया जा रहा है काम,
फील्ड से आने वाले कर्मचारियों को ज्यादा जानकारी ना होने के कारण पिस रहे हैं मरीज

फोटो संख्या-10 से 14
नसीब सैनी
कैथल। जिला अस्पताल में एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल के बाद से व्यवस्था लगभग चरमरा चुकी है। सबसे ज्यादा परेशानी लैब व 102 सेवा के संचालन में आ रही है। जिसका आलम यह है कि जिला अस्पताल के डॉक्टरों को अधिकारियों द्वारा मौखिक आदेश दिए गए हैं कि वे मरीजों के टेस्ट कम लिखें, ताकि लैब में ज्यादा भीड़ न हो। क्योंकि वहां टेस्ट करने के लिए आवश्यक स्टाफ ही नहीं हैं। साथ ही 102 एंबुलेंस सेवा की हालत यह है कि यहां वार्ड अटेंडेंट द्वारा काम चलाया जा रहा है। 50 से अधिक ड्राइवरों के मुकाबले महज 12 ड्राइवरों से काम लिया जा रहा है। लोगों को टेस्ट रिपोर्ट नहीं मिल पा रही।
लैब में महज एक एलटी : सबसे ज्यादा काम लैब में प्रभावित हो रहा है। यहां एक दिन में 400 से 500 तक टेस्ट होते हैं। चार शिफ्टों में महज 4 एलटी एक-एक करके काम चला रहे हैं। स्थिति यह है कि यहां शुक्रवार को 3 बजे तक मुश्किल से टेस्ट हो पाए थे, जिस समय अस्पताल की छुट्टी हो चुकी थी। जो मरीज टेस्ट रिपोर्ट नहीं ले पाए, उन्हें अब सोमवार को आना पड़ेगा। शनिवार सुबह 10 बजे भी यहां महज 1 एलटी था। जो किसी तरह अन्य कर्मचारियों की मदद से टेस्ट रिपोर्ट तैयार कर रहा था।
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गर्भवती महिलाओं के टेस्ट कर रहा वार्ड अटेंडेंट : कमरा नंबर 35 में गर्भवती महिलाओं के टेस्ट होते हैं। यहां ओपीडी में आई महिलाओं के टेस्ट किए जाने से तो सीधा इंकार किया जा रहा था। कृष्णा नामक महिला ने कहा कि वह यहां सुबह से बैठी है। लेकिन टेस्ट नहीं किया जा रहा। वहीं टेस्ट कर रहे युवक ने बताया कि वह वार्ड अटेंडेंट है। उसने इस काम की ट्रेनिंग ली हुई है, इसलिए वह टेस्ट कर रहा है। उसे केवल यहां दाखिल मरीजों के टेस्ट करने के लिए कहा गया है। ओपीडी के मरीजों का वह टेस्ट नहीं कर रहा। इसके अलावा 14 स्टाफ नर्स के हड़ताल पर होने के कारण नर्सिंग स्टाफ को अतिरिक्त काम करना पड़ रहा है।
102 सेवा को भी वार्ड अटेंडेट चला रहा है : इसी तरह से 102 सेवा केंद्र भी सेवाओं पर हड़ताल का सीधा असर है। यहां 50 से अधिक ड्राइवर व कंडक्टर सहित अन्य कर्मचारी हैं। जिनकी एवज में महज 12 ड्राइवरों से काम चलाया जा रहा है। हालात यह है कि यह पूरा काम एक वार्ड अटेंडेंट के हवाले है। पूछने पर इस कर्मचारी ने बताया कि वह कॉल अटेंड करता है और एंबुलेंस के ड्राइवर को सूचित कर देता है। शुक्रवार को 18, शनिवार को सुबह दस बजे तक 3 से 4 कॉल आई हैं।
डॉक्टरों को कम टेस्ट लिखने के लिए कहा गया है : एक डॉक्टर से मिली जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में आला अधिकारियों ने मौखिक आदेश दिए हैं कि वे केवल बेहद ही जरूरी टेस्ट ही लिखें। ज्यादा टेस्ट न लिखें, क्योंकि लैब में टेस्ट करने के लिए एलटी नहीं हैं।
नई एंबुलेंस दुर्घटनाग्रस्त, पुलिस में रिपोर्ट तक नहीं : अस्पताल सूत्रों ने यह भी बताया कि हड़ताल के कारण नई एंबुलेंस गाड़ियां नौसीखिया ड्राइवरों के हवाले की गई हैं। जिसमें से एक नई एंबुलेंस सीवन के निकट दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसे बाहर से ही ठीक करवाकर अस्पताल में खड़ा कर दिया गया है। इस एंबुलेंस का शीशा चटका हुआ है, साथ ही सामने की बॉडी में काफी डेंट पड़े हुए हैं।
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सीएमओ डॉ. सुरेंद्र नैन ने कहा कि हड़ताली कर्मचारियों से अपील की गई है कि वे सोमवार को काम पर लौट आएं। वे उनके लिए सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए विभाग से अनुमति ले लेेंगे कि उन्हें काम पर रख लिया जाए। यदि सोमवार को भी वे काम पर नहीं आए तो उन्हें टर्मिनेट कर दिया जाएगा। कम टेस्ट लिखें जैसी कोई बात नहीं हैं। न ही ऐसे कोई आदेश हैं। वैकल्पिक व्यवस्था करके लोगों को इलाज दिया जा रहा है।
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