मुझसे रोज मिलता है गली में, मगर करता है नमस्ते फेसबुक पर...
- साहित्य सभा की मासिक गोष्ठी का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। साहित्य सभा की मासिक गोष्ठी रविवार को जवाहर पार्क के सेवा संघ भवन में हुई। जिसकी अध्यक्षता हरियाणा साहित्यकार पंडित महेंद्र पाल पाई व संचालन रिसाल जांगड़ा ने किया।
गोष्ठी में दिनेश बंसल ने अपने व्यंग्य में कहा कि ‘करके तारिफ वो मेरी झूठी, जहर धीमा चटा गया मुझे।’ ईश्वर गर्ग कहते हैं जिसको अमृत विष सभी स्वीकार हों, प्रेम का सागर संभालने बस वही। चोरी के धंधे पर व्यंग्य करते हुए डा. तेजेंद्र ने कहा कि चोरी का धंधा, कभी न होवे मंदा, चाहे होवे जेल, यह धंधा न होवे फेल। फेसबुक के बदले क्रेज को लेकर रविंद्र ने कहा कि वह मुझसे रोज मिलता है गली में, मगर करता है नमस्ते फेसबुक पे। संसार को झूठा बताते हुए सतपाल शास्त्री ने कहा कि झूठा जग का प्यार बावले, धोखा यूं संसार बावले। पिता को नमनजंलि अर्पित करते हुए सतबीर जागलान ने कहा कि मेरे जीवन की इक आशा, सबसे अच्छे मेरे पापा। आंसू की एक बूंद का रहस्य खोलते हुए सरोज जोशी ने कहा कि आंसू की बूंद है गोल, इसमें छिपा है पीड़ा का पूरा भूगोल। दोस्ती करने से पहले सावधान करते हुए स्वामी टीसी अग्रवाल ने कहा कि दोस्ती करने से पहले सोच लीजिए, मिलते हो न मिजाज तो परहेज कीजिए। जीवन सदा एक सा नहीं रहता इस भाव को रिसाल जांगड़ा ने यूं बयां किया-कदे एक सी न रही जिंदगी की तस्वीर, पल में सिलगेंगे आग जूं, पल में ठंडा नीर। लाशों के रहस्य को पंकज ने यूं बयां किया, रोए होंगे यमदूत भी उन लाशों को देखकर, सहमी हुई धरती, डरा हुआ आसमान। गोष्ठी में कमलेश संधू, महेंद्र पाल, नवीन मल्होत्रा, स्वामी कृष्णानंद सरस्वती, ओमपति मोर, प्राचार्य शमशेर कैंदल, रामफल गौड़, वैदिक गर्ग, डा. चतुर्थभुज बंसल, नरेश चौधरी व श्याम सुंदर गौड़ ने भी अपनी प्रस्तुति दी।