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सरकारी नौकरी छोड़कर जीवन कर दिया बैडमिंटन को समर्पित

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सरकारी नौकरी छोड़ जीवन कर दिया बैडमिंटन को समर्पित
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पीवी संधू, सायना नेहवाल को देखकर बदलने लगा है युवाओं का रुख
कहा-सरकार मान्यता दे तो हरियाणा व पंजाब से निकलेंगी और प्रतिभाएं
बैडमिंटन में वर्ल्ड चैंपियन रहे पंजाब के रामलखन ने खेल के लिए छोड़ दी नौकरी
कैथल में मास्टर्स के नॉर्थ जोन मुकाबले में भाग लेने आया वर्ल्ड चैंपियन
फोटो संख्या-5व़ 13
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। 17 साल की उम्र में बैडमिंटन खेलना शुरू किया और 33 साल की सरकारी नौकरी के बाद पूरी तरह से अपने जीवन को बैडमिंटन को समर्पित कर दिया है। पंजाब के जालंधर के रहने वाले रामलखन बैडमिंटन में वर्ष 2004 में वर्ल्ड चैंपियन रह चुके हैं। अब उनका एक ही प्रयास है कि हरियाणा हो या पंजाब, यहां से ओलंपियन बैडमिंटन खिलाड़ी निकले। इसके लिए पूरा समय खेल को दे रहे हैं।
कैथल के डीपीएस में आयोजित नॉर्थ जोन बैडमिंटन मास्टर्स चैंपियनशिप में खेलने के लिए आए वर्ल्ड चैंपियन रामलखन ने अमर उजाला से बातचीत में बैडमिंटन को युवाओं का भविष्य बताया। रामलखन ने बताया कि उन्होंने 17 साल की उम्र में खेलना शुरू किया था। इसके बाद स्कूल लेवल पर नेशनल मुकाबले जीते। बाद में पंजाब में पॉवर कारपोरेशन में खेल के आधार पर नौकरी मिली और विभाग की ओर से खेलते हुए 30 बार नेशनल चैंपियन बने। इसके बाद 2004 में कोलालंपुर मलेशिया में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप में वर्ल्ड चैंपियन रहे। इसके बाद स्पेन, कनाडा, टर्की, न्यूजीलेंड में आयोजित मुकाबलों में भाग लिया। अब उन्होंने पीएसपीसीएल से अपनी सरकारी नौकरी 55 साल की उम्र में छोड़ दी है। जिस कारण यह है कि वे पूरा समय बैडमिंटन को देना चाहते हैं।
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बैडमिंटन के लिए मीडिया, सरकार व खेल प्रेमियों को आगे आना होगा। सायना नेहवाल, पीवी संधू जैसे खिलाडिय़ों ने इस खेल को भारत में नई पहचान दी है। लोग अब बैडमिंटन की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उनका सुझाव है कि हरियाणा व पंजाब में इस खेल के मेडलों को सरकारी नौकरी के लिए स्वीकृति दी जाए। उनके पास जालंधर में कोचिंग के लिए जगह ही नहीं है। सरकार जगह व अन्य सुविधाएं दें तो देश से बड़ी प्रतिभाएं सामने आ सकती हैं।
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हरियाणा की बेटियां अब बैडमिंटन में नाम कमा रही हैं- सुनीता कुमार
कैथल। लगातार 20 साल लंबे संघर्ष के बाद बैडमिंटन कोच नियुक्त हुई सुनीता कुमारी को बैडमिंटन खेल में सफलता के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा। अब वे सरकारी कोच के तौर पर सेवाएं दे रही हैं और खुद भी खेल रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकीं सुनीता शनिवार को डीपीएस में आयोजित नॉर्थ जोन बैडमिंटन मास्टर्स टूर्नामेंट में बतौर खिलाड़ी भाग लेने आई हुई हैं। सुनीता ने कहा कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं। इस खेल में तो बेटियों को काफी सफलता मिली है। अब प्रदेश में प्राइवेट बैडमिंटन एकाडमी खुल रही हैं। जिससे सुविधाएं बढ़ी हैं। लेकिन यह एक महंगा खेल है। इसीलिए सामान्य बच्चे भी इसमें आगे आएं, इसके लिए सरकार शटल्स, रैक व अन्य सुविधाएं दें तो खिलाड़ी परिणाम दे सकते हैं। वे कोच्ची में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप में खेल चुकी हैं। अभी मार्च में ही विशाखापटनम में आयोजित नेशनल चैंपियनशिप में वे तीसरे स्थान पर रहीं थीं। वे लगातार 20 साल तक खेलीं। एनआईएस किया। अब जाकर कोच की नौकरी मिली है। अभी भी वे ओपन मुकाबलों में खेलने जाती हैं। बैडमिंटन में भविष्य उज्ज्वल है। इसी तरह से दिल्ली की सुचित्रा भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी हैं। वे भी यहां खेलने के लिए आई हैं। सुचित्रा दिल्ली में अपना बिजनेस करती हैं। लेकिन बैडमिंटन से लगाव होने के कारण वे वहां एक क्लब से जुड़ी हुई हैं।
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