चौदह साल की मेहनत का मिला फल
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। हाल ही में हरियाणा में नियुक्त हुए डिस्ट्रिक्ट अटर्नी के 7 उम्मीदवारों में अकेली सफल महिला उम्मीदवार डॉ. सुमन बंसल को बिजली विभाग के प्रदेश मुख्यालय में नियुक्ति मिली है। जिस पर परिवार में खुशी का माहौल है। परिवार, न्यायालय में प्रैक्टिस के बीच पढ़ाई के लिए 8 से 10 घंटे तक समय निकाल कर इस मुकाम तक पहुंची डॉ. सुमन बंसल ने अथक मेहनत की। उन्होंने परीक्षा में सर्वाधिक 82 प्रतिशत अंक हासिल किए।
अपने आवास पर नियुक्ति को लेकर अनुभव साझा करते हुए डॉ. सुमन ने कहा कि उनकी वर्ष 2003 में एडवोकेट संजीव जिंदल के साथ शादी हुई थी। उस समय एलएलएम के बाद पीएचडी में उनका रजिस्ट्रेशन हो चुका था। लेकिन शादी के बाद न तो पति और न ही ससुराल में किसी ने उनकी पढ़ाई पर आपत्ति जताई। वह पहले अपनी ससुराल निसिंग और बाद में कैथल में रहने लगीं। यहां पति के लगातार प्रोत्साहन से वे पढ़ाई से जुड़ीं रहीं। उन्होंने 13 साल के बेटे मृदुल व 7 साल की बेटी गनिका की देखभाल के साथ-साथ परिवार का काम भी किया। पति के साथ जिला न्यायालय में प्रैक्टिस भी की। उनकी ननद ने उनका काफी सहयोग किया। जिला न्यायवादी के लिए कड़ी मेहनत की। सुबह साढ़े चार बजे उठकर पढ़ती थीं। इसके बाद रात को भी साढ़े ग्यारह बजे तक नियमित रूप से पढ़ती थीं। उनकी सफलता में उनकी सास संतोष देवी का अहम रोल है।
डा. सुमन बंसल के पति एडवोकेट संजीव जिंदल ने कहा कि उन्हें खुशी है कि सुमन का जिला न्यायवादी के तौर पर चयन हुआ है। इसके पीछे सालों की उनकी मेहनत और लग्न है। उन्होंने भी उसका पूरा सहयोग किया। वर्ष 2003 में विवाह के बाद ही उसने पीएचडी, नेट क्वालीफाई किया। पहले दिल्ली में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की परीक्षा पास की। इंटरव्यू भी फेस किया। लेकिन मेरिट में स्थान नहीं बन पाया। अब हरियाणा में एडीजे की मुख्य परीक्षा दी हुई है। परिणाम नहीं आया। गत 2 मई को डीए के लिए साक्षात्कार था, उससे चार दिन पहले ही उनकी छोटी बहन की शादी थी। इन सब व्यस्तताओं के बीच यह सफलता वास्तव में सुखद है। बेटे मृदुल व बेटी गनिका ने अपनी मां की सफलता पर खुशी जताई। वहीं उनके भाई शिव कुमार, मुंशी नरेश कुमार सहित पूरे परिवार में खुशी की लहर है।