संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग ने शहर की पेयजल व्यवस्था को सुधारने के लिए नई कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत शहर में बिछी लगभग 90 किलोमीटर लंबी पुरानी पेयजल पाइपलाइनों को बदला जाएगा। इस पूरी परियोजना पर करीब 5 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
शहर के अर्जुन नगर, प्रताप गेट, माता गेट सहित कई पुराने मोहल्लों और मुख्य मार्गों के नीचे दशकों पुरानी पाइपलाइनें दबी हुई हैं। जर्जर होने के कारण ये लाइनें कई स्थानों पर लीक हो रही हैं, जिससे लाखों लीटर पानी बर्बाद होता है। इसके अलावा कई क्षेत्रों में सीवेज का गंदा पानी पेयजल में मिलने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। इस वजह से स्थानीय लोगों को कम दबाव और दूषित पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
नई पाइपलाइन बिछने से इन समस्याओं का स्थायी समाधान होने की उम्मीद है। आधुनिक गुणवत्ता वाली पाइपलाइन के उपयोग से पानी का दबाव बेहतर होगा और अंतिम छोर तक रहने वाले लोगों को भी पर्याप्त पेयजल मिल सकेगा। साथ ही लीकेज की संभावना कम होने से पानी की बर्बादी पर भी रोक लगेगी।
जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग के एसडीओ गोपाल ने बताया कि शहर की 90 किलोमीटर पाइपलाइन बदलने के लिए 5 करोड़ रुपये का एस्टीमेट मुख्यालय भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही आगामी कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
मुख्यालय भेजा गया एस्टीमेट
अधिकारियों ने शहर का विस्तृत सर्वे करने के बाद करीब 90 किलोमीटर क्षेत्र को चिन्हित किया है, जहां पाइपलाइन बदलना आवश्यक है। विभाग ने तकनीकी बारीकियों और सामग्री की लागत को ध्यान में रखते हुए 5 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार कर स्वीकृति के लिए मुख्यालय भेज दिया है। अधिकारियों के अनुसार, योजना को उच्च स्तर पर सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है और अब औपचारिक स्वीकृति का इंतजार है। स्वीकृति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी और उम्मीद है कि अगले कुछ हफ्तों में काम धरातल पर शुरू हो जाएगा।
दो प्लांट से हो रही आपूर्ति
शहर में दो वाटर ट्रीटमेंट प्लांट कार्यरत हैं। इनमें प्यौदा रोड स्थित प्लांट की क्षमता 20 एमएलडी और मानस रोड स्थित प्लांट की क्षमता 13 एमएलडी है। शहर में 16 बूस्टर और 40 पंपों के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। पाइपलाइन बदलने के दौरान आम लोगों को कम से कम असुविधा हो, इसके लिए विभाग चरणबद्ध तरीके से खुदाई और मरम्मत का कार्य करेगा।