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1952 में अस्तित्व में आए हलका कलायत ने पैप्सू सरकार को दिया था प्रथम मुख्यमंत्री

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कलायत। गेहूं का सीजन सिमटने के साथ ही कलायत हलका में चुनावी हलचल बढ़ने लगी है। कलायत हलका कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र का संभाग है। जिला कैथल की चार विधानसभाओं में सबसे बड़े हलके के रूप में कलायत की पहचान है। इस समय आजाद विधायक के रूप में जयप्रकाश कलायत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। मतदान में केवल 15 दिन शेष हैं पर हलका में चुनावी हलचल अभी तक केवल नाम मात्र की थी। मगर गेहूं का सीजन यौवन पर होने के चलते किसान अपने खेतों में ही व्यस्त थे।
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अब जबकि गेहूं का सीजन सिमटता जा रहा है तो गली मुहल्ले व चौपालों पर चुनाव चर्चा होने लगी है। चुनावी माहौल गर्माता देख भाजपा, इनेलो, जजपा, कांग्रेस, लोसुपा बसपा व कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों ने अपने-अपने चुनावी कार्यालय भी कलायत नगर में खोल लिए है। इन कार्यालयों में बैठकर ही पार्टी पदाधिकारी व समर्पित कार्यकर्ताओं द्वारा चुनावी संबंधी रूपरेखा तैयार की जा रही है कि किस प्रकार से मतदाताओं का रूझान उनकी पार्टी के उम्मीदवार की ओर किया जाए। अभी तक किसी भी पार्टी के शीर्ष नेता ने नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के पश्चात हलका कलायत में दस्तक नहीं दी तथा न ही कोई बड़ी रैली का आयोजन हो पाया है। कलायत हलका में इस समय चुनाव का विशेष शोरगुल न होने के पीछे उम्मीदवार द्वारा आदर्श आचार संहिता के चलते फूंक-फूंक कर कदम रखना बताया जा रहा है।
1952 में अस्तित्व में आए कलायत ने पैप्सू को दिया था पहला सीएम : हलका कलायत 1952 में अस्तित्व में आ गया था। आजादी के पश्चात पंजाब, हरियाणा व हिमाचल को मिला कर पैप्सू स्टेट का नाम दिया गया था। पैप्सू की पहली सरकार बनी तो उस दौरान बाबू बृषभान के तौर पर पैप्सू सरकार को प्रथम मुख्यमंत्री देने का श्रेय भी हलका कलायत को ही जाता है।
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कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र का सबसे बड़ा हलका है कलायत : कलायत हलका में इस समय कुल 2 लाख 894 मतदाता हैं जिसमें 1,08,820 पुरुष, 92,072 महिला मतदाताओं के साथ 2 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल है। चुनावों को लेकर सबसे अधिक पोलिंग भी कलायत हलका में ही होती रही है।
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