फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नमी के नाम पर मनमानी, कर्मचारी दो से 10 कट्टों तक की कम दे रहे रिसीविंग

विज्ञापन
विज्ञापन
कैथल। अनाज मंडियों में किसानों व आढ़तियों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। अब नमी के चलते गेहूं खरीद का कार्य बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। खरीद एजेंसियां नमी ज्यादा बताकर खरीद नहीं कर रही हैं, वहीं जो खरीद हो रही है, उसमें नमी की मात्रा ज्यादा पाए जाने पर एजेंसियों के कर्मचारी 2 से लेकर 10 कट्टों तक की कम रिसीविंग दे रहे हैं। जिसका खामियाजा आढ़तियों को भुगतना पड़ रहा है।
विज्ञापन

अनाज मंडी में गेहूं बेचने के लिए आए किसान राजकिशन, सतबीर, रामस्वरूप ने कहा कि मंडी में वे तीन दिन से गेहूं लिए बैठे हैं। अधिकारी व कर्मचारी आते हैं, ढेरी को रिजेक्ट करके चलते जाते हैं। जबकि इस अवस्था में गेहूं हमेशा बिकता रहा है। उनकी मांग है कि गेहूं की खरीद की जाए।
बारदानें की बड़ी समस्या : कृष्ण कुमार, विजय कुमार सहित कई आढ़तियों ने बताया कि गेहूं खरीद के लिए सबसे बड़ा संकट बारदाने का बना हुआ है। खरीद एजेंसियों के अधिकारी पहले गेहूं खरीदते हैं। इसके बाद कार्यालय में जाकर गेहूं का रिकॉर्ड चढ़ाते हैं। फिर बारदाना लोड होकर मंडी में आता है। इस पूरी प्रक्रिया में एक से दो दिन लग रहे हैं। जिस कारण मंडी में बारदाने की भारी कमी बनी हुई है। गेहूं खुले में पड़ा हुआ है। मौसम के बदलते तेवरों के चलते सभी की सांसें अटकी हुई हैं।
विज्ञापन

उठान में 5 रुपये रिश्वत : आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मित्तल ने कहा कि आढ़तियों में खरीदे गए गेहूं को उठवाने के लिए रिश्वत का चलन हो गया है। ट्रक चालकों को प्रति कट्टा 5 रुपये तक रिश्वत देकर आढ़ती गेहूं का उठान करवा रहे हैं। कहीं उनकी गेहूं सूख कर वजन कम न हो जाए। इस होड़ में आढ़ती खुद ही लुट रहे हैं। मजबूरन उन्हें रिश्वत देनी पड़ रही है। इसी तरह से दूसरी एसोसिएशन के प्रधान शमशेर सिंह मित्तल का कहना है कि उठान के लिए अवैध वसूली चल रही है।
गोदामों में काटे जा रहे हैं 2 से लेकर 10 तक कट्टे : सबसे ज्यादा परेशानी आढ़तियों को गोदामों में आ रही है। जहां ट्रकों में लोड होकर गेहूं उतारा जा रहा है। आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मित्तल व शमशेर सिंह मित्तल का कहना है कि गोदामों में कर्मचारी परखी मार कर नमी की मात्रा की जांच करते हैं। थोड़ी सी भी नमी पाए जाने पर 2 से लेकर 10 कट्टे तक कम रिसीव किए जा रहे हैं। यदि ट्रक में 380 कट्टे हैं तो उसे 375 या 370 तक रिसीव किया जा रहा है। बाकी कट्टे बिना रिकॉर्ड के अंदर जमा हो रहे हैं। जिसका खामियाजा आढ़तियों को भुगतना पड़ेगा। आढ़ती इस कारण मजबूर हैं कि यदि उसी ट्रक को वापस लेकर आना पड़ गया तो उन्हें 5 से लेकर 7 हजार तक ट्रांसपोर्टेशन व मजदूरी पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। आढ़ती रविवार को इन समस्याओं को लेकर बैठक भी कर सकते हैं।
बाबा लदाना खरीद केंद्र पर तीन दिन से नहीं हुई खरीद : बाबा लदाना खरीद केंद्र पर सतीश जैन, विनोद जैन, रामफल मित्तल, विक्रम मित्तल ने बताया कि बाबा लदाना में 17 अप्रैल के बाद से खरीद नहीं हुई। एफसीआई द्वारा शुरू में खरीद की गई। इसके बाद डीएफएससी को यह सेंटर दे दिया गया। अब खरीद नहीं हो रही। आढ़ती व जमींदार परेशान हैं।
गेहूं के कट्टे काटना गलत है : डीएफएससी वरिंद्र सिंह का कहना है कि मंडियों में नमी वाले गेहूं को एजेंसी के अधिकारी कैसे खरीद सकते हैं। जो सूखा होगा, वही खरीदा जा सकेगा। रिश्वत वसूलने को लेकर दोनों प्रधानों से बात हुई थी कि अपनी एक समिति बनाकर इस मसले से निपटा जा सकता है। दोनों प्रधानों से फिर से बात की जाएगी। यदि किसी एजेंसी के गोदाम में भेजे गए कट्टे रिकॉर्ड में कम लिए जा रहे हैं तो यह गलत है। इस बारे में कर्मचारियों से जवाब मांगा जाएगा। यदि गेहूं में नमी है तो वे नमी को रिकॉर्ड में ले आएं। अतिरिक्त कट्टे नहीं ले सकते।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें