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सीता हरण का विलाप कर रहे श्री राम को साधु रुप में मिले हनुमान, ऋषिकुट पर्वत पर पहुंचकर श्री राम का हुआ सुग्रीव से मिलाप

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हनुमान से श्रीराम का मिलन और बालि वध का किया मंचन
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श्री ग्यारह रुद्री मंदिर में रामलीला मंचन का छठा दिन
फोटो नंबर-34
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। चंदाना गेट स्थित श्री ग्यारह रुद्री मंदिर में श्री गणेश ड्रामाटिक क्लब की ओर से आयोजित रामलीला मंचन में मंगलवार की रात श्री राम का हनुमान को मिलना साबरी के बेर खाना, बाली वध का दृश्य दिखाया। मंचन की शुरुआत पर क्लब के सभी कलाकारों ने प्रार्थना की।
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सीताहरण के बाद विलाप करते हुए श्रीराम को साधु के रूप में हनुमान जी मिलते है। इसके बाद वे सबरी के आश्रम में पहुंचते है और उसके बाद वे उसके जूठे बेर खाते है। इसके बाद वे ऋषिकूट पर्वत पर पहुंचते हैं, जहां उनकी सुग्रीव से मुलाकात होती है। श्रीराम सुग्रीव को सीता को रावण द्वारा हर ले जाने की बात बताते हैं। इसके बाद दोनों में मित्रता हो जाती है। वे उन्हें माता सीता द्वारा फेंके गए आभूषण भी दिखाते हैं। इसके बाद सुग्रीव श्रीराम को भी अपनी व्यथा सुनाते हैं। सुग्रीव बताते है कि किस तरह से उसके भाई बाली ने उसके राज्य पर अपना अधिकार जमा रखा है। जिसके श्रीराम बाली वध करने के लिए सुग्रीव को आश्वासन देते हैं। वह छुपकर बाली का वध कर देते और सुग्रीव का राजतिलक कर उन्हें पंपापुर का राज्य सौंप देते है। इस पर श्री राम मरते हुए बाली को चौपाई सुनाते हुए कहते है कि अनुज बधू भाबिनी सूत नारी। ए चारी इन्हहि कुदृष्टि बिलोकई जई ताहि बधे कुछ पाप न होई। अर्थात श्री ने कहा, हे मूर्ख, सुन, छोटे भाई की स्त्री, बहिन, पुत्र की स्त्री और कन्या, ये चारों समान है। इनको जो कोई बुरी दृष्टि से देखता है। उसे मारने में कोई पाप नहीं होता। मंचन में श्रीराम के पात्र में चन्नी, लक्ष्मण के पात्र में विनोद, हनुमान के पात्र में संदीप, सुग्रीव के पात्र में सुभाष, साबरी के पात्र में सतीश, बाली के पात्र में बब्बू व तारा के पात्र में शुभम में अपनी प्रस्तुति दी।
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