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मेला स्थल के आसपास फैली गंदगी, वट वृक्ष के पास घट सकती है बड़ी दुर्घटना

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मेला स्थल के आसपास फैली गंदगी, वट वृक्ष के पास घट सकती है बड़ी दुर्घटना
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फोटो नंबर-30 से 32
अमर उजाला ब्यूरो
पूंडरी। फल्गु तीर्थ के आसपास फैली गंदगी से काफी परेशानी हो रही है। तीर्थ के साथ लगती सड़क के पास अब भी गंदगी के ढेर व गोबर पड़ा हुआ है। पूर्व में आयोजित मेले के दौरान प्रशासन द्वारा ग्रामीणों के पशुओं को बाहर खेतों में बांधने के लिए सूचित कर दिया जाता था और जो पशुपालक बाहर नहीं ले जाते थे, उन्हें नोटिस भी दिया जाता था, लेकिन इस बार ना तो कोई मुनादी करवाई गई और ना ही किसी पशुपालक को पशु बाहर ले जाने के लिए कहा गया है। ऐसी स्थिति में भीड़ के दौरान किसी का भी पशु खुलकर बाहर चला जाए तो वह जानमाल का नुकसान कर सकता है। तीर्थ पर मच्छर भी बहुत पनप रहे है। स्वास्थ्य विभागों को ग्रामीणों ने भी कई बार मच्छर मार दवा का स्प्रे या फोकिंग करवाने के लिए कहा है, लेकिन प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। कैथल नगर परिषद से गंदगी डालने के लिए डस्टबिन भी लाये गए है, लेकिन उन्हें अभी तक उचित स्थान पर नहीं रखा गया है। मेला प्रशासक एसडीएम कलायत जगदीप सिंह ने जबकि सख्त निर्देश जारी किए हुए है कि तीर्थ के आसपास गंदगी न फैलने दें और पोलिथिन का प्रयोग मेला क्षेत्र में न करें। उसके बावजूद भी धड़ल्ले से पोलिथिन का दुकानों पर प्रयोग किया जा रहा है।
मेला क्षेत्र में रोशनी भी अपेक्षाकृत कम
इस बार तीर्थ व मेला क्षेत्र में अपेक्षाकृत काफी कम रोशनी है। तीर्थ पर एलइडी बल्ब लगाए गए है, कई बड़ी लाइटों को शुरू नहीं किया गया है, जबकि वर्ष 2015 में आयोजित मेले के दौरान चार बड़ी फल्ड लाइटें लगाई गई थी। मेला क्षेत्र गांव की गलियों में भी अभी तक बल्ब की लडिय़ां नहीं लगाई गई है। गांव की गलियों में सुबह के समय अंधेरा होने की वजह से बाहर से और गांव में से आने वाले श्रद्धालु को काफी समस्या होती है। सुरक्षा की दृष्टि से भी सुबह के समय अंधेरा होने की वजह से अप्रिय घटना घटने की आशंका बनी रहती है। इस बारे जब अधिकारियों से बात कि जाती है तो बारिश होने का बहाना बनाया जाता है, जबकि दो दिनों से पुरी तरफ मौसम भी साफ है। प्राचीन वट वृक्ष के पास बनाये गए घाट के साथ दिवार न बनाये जाने से भीड़ होने पर कोई भी बड़ी दुर्घटना घट सकती है।
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सुबह पांच हजार तीर्थ यात्रियों ने किया पवित्र स्नान।
बुधवार सुबह 3 बजे से ही श्रद्धालु ने तीर्थ में स्नान शुरू कर दिया था। सुबह के समय लगभग पांच हजार यात्रियों द्वारा स्नान कर पिंडदान करवाया गया है। तीर्थ पुरोहित पितृकर्म करवाने के लिए हर समय तीर्थ पर ही मौजूद रहते है। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मेले की व्यवस्था को लेकर मीटिंगों का दौर जारी रहा। मेला प्रशासक जगदीप सिंह ने पीने के पानी, लाइट, शौचालय, कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाएं व यात्रियों की सुविधा के लिए अधिकारियों को उचित दिशा निर्देश दिए। उन्होंने किसी भी शरारती तत्वों से निपटने के लिए सख्ती से पेश आने के भी निर्देश दिए।
रात में भी जारी रहा तीर्थ पर निर्माण कार्य।
बारिश बंद होने के बाद तीर्थ पर पड़ा पश्चिम की तरफ दीवार बनाने का अधूरा कार्य दिन और रात में पुरा किया गया। मंगलवार की रात को तीर्थ से मजदूरों द्वारा मलबा हटाया गया। तीर्थ के साथ अधूरी पड़ी गलि पर ब्लाक लगाये गए। उसके बावजूद भी तीर्थ के पानी व तीर्थ पर कई जगह गंदगी फैली पड़ी थी। जिस तरफ बोट खड़ी की गई है, उसके पास घास फंस व अन्य कबाड़ होने के कारण वहां पर विषैले सांप व अन्य जीव भी रह रहे है।
गली के निर्माण में बरती जा रही है लापरवाही-आर्य
तीर्थ के साथ पश्चिम की तरफ बनाई जा रही गलि में जो ब्लाक लगाए जा रहे है, वे आनन फानन में मिट्टी में ही लगाऐ जा रहे है। जिसका आज भारतीय किसान संघ के प्रदेश प्रवक्ता व ग्रामीणों ने मौके पर जाकर विरोध किया और ठेकेदार को नियमानुसार ब्लाकों के नीचे मटरेट व अन्य निर्माण सामग्री डालने के लिए कहा। ग्रामीण भूषण राणा, बलजीत सिंह, देशराज, महिपाल व सुरेश ने कहा कि अब ठेकेदार ब्लाक लगाकर चला जाऐगा, लेकिन बाद गलि में लगे ब्लाक बैठ जाऐंगे और गलि में पानी खड़ा रहेगा। आर्य ने कहा कि मेले की व्यवस्था के लिए जो 4.98 करोड़ रुपए की ग्रांट मंजूर हुई है, उसके खर्च के लिए कमेटी का गठन किया जाए, नहीं तो वे ग्रामीणों के साथ बाद में हर पैसे की जानकारी प्राप्त करेंगे।
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मेले में यात्रियों की सुविधा के लिए हर संभव सुविधा उपलब्ध करवाई जाऐगी। पैसे का कहीं भी दुरूपयोग नहीं होने दिया जाऐगा। मेले में कानून व्यवस्था बनाकर रखी जाऐगी। प्रशासन तैयारियां पूर्ण करवाने में दिनरात जुटा हुआ है।
जगदीप सिंह एसडीएम मेला प्रशासक।
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