जनस्वास्थ्य विभाग के दो कार्यकारी अभियंताओं को राज्य सूचना आयोग ने लगाया जुर्माना
कैथल निवासी व्यक्ति की शिकायत पर जवाब न देने पर आयोग का सख्त रुख
एक को 15 हजार तो दूसरे को 5 हजार का जुर्माना
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। एक व्यक्ति की मांग पर उसे सही ढंग से सूचना न दिए जाने पर राज्य सूचना आयोग ने जनस्वास्थ्य विभाग के दो अधिकारियों को 15 हजार व 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही शिकायतकर्ता को भी क्षतिपूर्ति के लिए 1500 रुपये देने के आदेश जारी किए हैं।
सीए सतीश सिंघल ने बताया कि शिव कुमार बंसल ने अपने घर के आस-पास पानी की निकासी न होने पर जनस्वास्थ्य विभाग से सूचना मांगी थी। जिसमें उन्होंने पूछा था कि उनके घर के आस-पास से पानी की निकासी के लिए विभाग के पास क्या नीति है। कितने पंप लगाए गए हैं। कब लगाए गए हैं। इन्हें चलाने के लिए डीजल कितना खर्च हुआ। इस तरह से कई जानकारियों के जवाब में अधिकारियों ने अमृत योजना का पूरा चिट्ठा शिकायतकर्ता को भेज दिया और इतना कहा कि इस योजना के तहत शहर से पानी की निकासी के लिए प्रयास किया जा रहा है। इसके बाद आपत्ति जताई गई तो द्वितीय अथॉरिटी के पास अपील की गई। जहां पता चला कि एक साल से जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने सूचना देने की बजाए टालमटोल की। जिस पर शिकायतकर्ता ने राज्य सूचना आयोग में अपील की। जिसमें सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयुक्त हेमंत अत्रि ने शिकायतकर्ता को तुरंत प्रभाव से सूचना देने, जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता एवं वर्तमान में नारनौल में नियुक्त कार्यकारी अभियंता विनोद कुमार सरोहा को 15 हजार रुपये का जुर्माना राशि सूचना को 6 माह के लिए देरी करने पर जमा करवाने के आदेश जारी किए। साथ ही कार्यकारी अभियंता डिविजन नंबर एक कैथल वीके गुप्ता को सही सूचना न देने पर 5 हजार रुपये जुर्माना देने के आदेश जारी किए। साथ ही जनस्वास्थ्य विभाग के अधीक्षक अभियंता को निर्देश जारी किए कि वे शिकायतकर्ता को 1500 रुपये की राशि बतौर क्षतिपूर्ति के दे।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि आयोग के आदेशों के तहत आवेदनकर्ता को सूचना दे दी गई है।