अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। गुहला से विधायक कुलवंत बाजीगर ने विधानसभा में अपने क्षेत्र की कई समस्याओं को उठाया। मुख्य रूप से गुहला व राजौंद के भू-जलस्तर के मामले में डार्क जोन में चले जाने के कारण किसानों को आ रही समस्या की ओर उन्होंने सरकार का ध्यान दिलवाया। विधायक ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को इस क्षेत्र के किसानों की समस्या के बारे में कहा कि दोनों ब्लॉकों को भू-जलस्तर के क्षेत्र में डार्क जोन में शामिल किया हुआ है। जिस कारण यहां ट्यूबवेल नहीं लगाए जा सकते और ना ही उनकी गहराई बढ़ाई जा सकती है। ठीक है जलस्तर को बनाए रखने के लिए यह जरूरी है। लेकिन इस क्षेत्र के किसानों को अब सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है। कहीं-कहीं तो 1000 से लेकर 1200 फुट गहराई तक पानी मिल रहा है। जिससे किसान परेशान हैं। यदि यही हाल रहा तो इस क्षेत्र में फसल उत्पादन बंद हो जाएगा। जिससे प्रदेश के साथ-साथ किसानों को भारी नुकसान होगा। इसलिए उनकी मांग है कि यहां ट्यूबवेलों की गहराई बढ़ाने की अनुमति दी जाए।
विधायक ने घग्गर पार के 15 गांवों को बाढ़ से बचाने व वहां सिंचाई का पानी देने के लिए एक नहर खुदाई की मांग की। करीब 15 किलोमीटर की इस नहर के खोदे जाने से घग्गर पार के पंजाब सीमा पर स्थित गांव खुशहाल माजरा, नंदगढ़, हंसुमाजरा सहित अनेकों गांवों को बारिश के पानी को सिंचाई के लिए दिया जा सकेगा। इस समय यह पानी बिना प्रयोग के घग्गर नदी में बह जाता है। किसानों की फसलें भी खराब होती हैं। विधायक ने तीसरा महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए गुहला-चीका शहर में 10 एमएलडी क्षमता का एक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगवाए जाने की मांग की। जिसके लिए जमीन नगर पालिका चीका की ओर से देने का एलान किया।
गुहला व राजौंद चले गए हैं डार्कजोन में, मुख्यमंत्री जी यहां ट्यूबवेलों की गहराई बढ़ाने की अनुमति दे दीजिए
गुहला के विधायक ने विधानसभा में उठाया मुद्दा, कहा-जल संरक्षण की दिशा में कदम उठाएं, लेकिन किसानों की समस्या पर भी ध्यान दें
गुहला के घग्गर पार के 15 गांवों के लिए नहर बनाए जाने की मांग की, ताकि बारिश के पानी का हो सके सिंचाई के लिए प्रयोग
गुहला शहर में 10 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगवाए जाने का मामला भी उठाया
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