सजूमा व कुतुबपुर रेलवे स्टेशन के बीच पहुंचा रेलवे के विद्युतीकरण काम
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। कुरुक्षेत्र से नरवाना वाया कैथल रेलवे लाइन के विद्युतीकरण का काम तेजी से चल रहा है। इस काम के पूरा होने पर इस रूट पर काफी बड़ी ट्रेनें मिल सकेंगी। सुजूमा व कुतुबपुर रेलवे स्टेशन के बीच विद्युतीकरण के लिए खंभे डालने के लिए काम पहुंच गया है। इससे शीघ्र ही इस काम के पूरा होने की उम्मीद है।
अभी तक चलती हैं केवल दो बड़ी गाड़ियां
इस रेल रूट पर अभी तक केवल दो बड़ी गाड़ियां चलती हैं। इसमें दिल्ली से कुरुक्षेत्र व जयपुर-चंडीगढ़ इंटरसिटी। इसके अलावा कुरुक्षेत्र से जींद वाया कैथल, नरवाना सामान्य गाड़ियां चलती हैं। रेलवे रूट 1890 से बना हुआ है। लेकिन अभी तक इसे विकसित नहीं किया गया था।
विद्युतीकरण से बढ़ेगी इंटर स्टेट कनेक्टिविटी
इस रूट के विद्युतीकरण किए जाने से पंजाब, हरियाणा व उत्तर प्रदेश सहित दिल्ली व चंडीगढ़ जाने वाली ट्रेनों के बच कनेक्टिविटी बढ़ेगी। इसका फायदा पूरे जिले के लोगों को होगा। अभी तक बड़ी ट्रेनों के लिए लोगों को या तो कुरुक्षेत्र, जींद व नरवाना या फिर अंबाला जाना पड़ता है।
कलायत तक पहुंचा विद्युत के खंभों के लिए गड्डे खोदने का काम
विद्युतीकरण के कार्य पर 85 करोड़ रुपया खर्च हो रहा है। इसके खंभों के लिए गड्ढे खोदने का काम कलायत रेलवे स्टेशन तक पहुंच गया है। कुछ ही दिनों में यह कैथल तक पहुंचा जाएगा। इसके बाद कुरुक्षेत्र तक गड्ढे खोदे जाने के बाद विद्युतीकरण का काम पूरा होने के निकट पहुंच जाएगा।
रेल यात्री कल्याण समिति के चेयरमैन सतपाल गुप्ता ने बताया कि विद्युतीकरण के कार्य के तहत गड्ढे खोदने का काम कुतुबपुर रेलवे स्टेशन तक पहुंच गया है। शीघ्र ही यह कैथल पहुंच जाएगा। इस ट्रैक के विद्युतीकरण होने से कैथल को दिल्ली तक एक ओर पैसेंजर ट्रेन मिल जाएगी। इसके अलावा हरिद्वार सहित लंबी दूरी की ट्रेनें जो इस समय रोहतक की ओर से होकर जाती हैं, कई ट्रेनें कैथल से होकर जा सकेंगी। रेलवे से कई जानकारियां मांगी गई हैं कि इस रूट के विद्युतीकरण होने से किस-किस ट्रेन को इस रूट से निकाला जा सकता है। यह जानकारी मिलने के बाद सरकार से मांग की जाएगी कि इन ट्रेनों को नरवाना-कुरुक्षेत्र रेलवे ट्रेक से निकाला जाए।
रेलवे के प्रवक्ता नितिन चौधरी ने बताया कि नरवाना से कुरुक्षेत्र ट्रैक के विद्युतीकरण कार्य पर 85 करोड़ रुपये खर्च किया जा रहा है। इस साल के अंत तक यह काम लगभग पूरा हो जाएगा। यात्रियों के कल्याण के लिए यह परियोजना स्वीकृत की गई है।