संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। नगर परिषद हर माह सुगम स्वच्छता एजेंसी को डोर-टू-डोर कचरा उठान पर करीब 65 लाख रुपये भुगतान करने का दावा करती है लेकिन शहर में सफाई व्यवस्था ध्वस्त नजर आती है। गत 11 नवंबर को डीसी प्रीति ने शहरी क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के सख्त निर्देश नगर आयुक्त और नगर पालिका सचिवों को दिए थे। तब लोगों को उम्मीद जगी थी कि शहर की तस्वीर बदलेगी, लेकिन 19 दिन बाद भी हालात जस के तस हैं।
अधिकारी बैठक से निकले तो निर्देश हवा में उड़ गए। नतीजतन मुख्य सड़कों, बाजारों और गलियों में कूड़े के ढेर वैसे ही पड़े हैं। कई स्थानों पर महात्मा गांधी की तस्वीर और स्वच्छ भारत अभियान के स्लोगन के ठीक नीचे कूड़े के अंबार व्यवस्था का सच बयान कर रहे हैं। करनाल रोड पर पार्षद के नाम वाली पट्टी के नीचे ही कूड़े का ढेर सिस्टम पर तंज कस रहा है। गीता महोत्सव कार्यक्रम से पहले भी सफाई की सुध नहीं ली गई। इससे नगर परिषद की लापरवाही बेनकाब होती है।
सुगम स्वच्छता एजेंसी का दावा है कि शहर से लगभग 100 टन कचरा रोज निकलता है। सवाल यह है कि यदि इतना कूड़ा उठ रहा है तो सड़कों-गलियों में जमा कूड़ा कहां से आ रहा है? यह जांच का विषय है।
स्लोगन में स्वच्छ शहर, धरातल पर उलटी तस्वीर
स्वच्छ भारत के स्लोगन और महात्मा गांधी की तस्वीरों से शहर की दीवारें तो सजी हैं, लेकिन इनके नीचे जमा कूड़ा अफसरों की लचर कार्यशैली उजागर करता है। पिछले 15 दिन से 160 सफाई कर्मचारी धरने पर बैठे हैं, लेकिन उनका टेंडर अभी तक नहीं करवाया गया। नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रधान महेंद्र का कहना है कि अधिकारी सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे।
क्या दिए थे िनर्देश
डीसी प्रीति ने साफ निर्देश दिए थे कि नगर परिषद और नगरपालिका अधिकारी स्वच्छता अभियान को निरंतर जारी रखें और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने कहा था कि शिक्षण संस्थान, न्यायालय, अस्पताल, लाइब्रेरी, बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थानों के पास कचरा डंपिंग की अनुमति नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद करनाल रोड पर शिक्षण संस्थानों के पास ही कचरा डंप होने से अधिकारियों के निर्देशों की खुली अवहेलना दिख रही है।
करनाल रोड पर आईजी कालेज के पास लगे कूड़े के ढेर में मुंह मारते पशु। संवाद