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96 घंटे में कैसे बना दी गई सिटी स्कवॉयर सेंटर में 602 पाइल्स(बेसमेंट में स्तंभ)

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96 घंटे में कैसे बना दी गई सिटी स्क्वायर सेंटर में 602 स्तंभ
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पार्षद सरदाना ने 3 घंटे एक-एक सवाल उठाया, अधिकारियों के पास नहीं था कोई जवाब
8 अक्टूबर को जारी हुआ वर्क ऑर्डर, 22 अक्टूबर को जारी कर दी गई 3 करोड़ रुपये से अधिक की राशि?
बैठक में कई बार कहा पार्षदों ने-रुपये लेकर नियमों की अनदेखी कर करोड़ों रुपये की राशि जारी कर दी गई ठेकेदार को, दर्जनों बार हुआ नियमों की धज्जियां उड़ाने का शब्द प्रयोग
कार्रवाई की मिनट्स की प्रति लेकर ही बैठक से निकले पार्षद
नसीब सैनी
कैथल। नगर परिषद कैथल के माध्यम से बनवाए जा रहे सिटी स्क्वायर सेंटर में न केवल कैथल बल्कि कोई न कोई अधिकारी जो चंडीगढ़ में बैठा है, वह भी निर्माण एजेंसी पर मेहरबान है। तभी तो एक अतिरिक्त एमई की नियुक्ति उस समय होती है, जब इस एजेंसी को निर्माण के लिए वर्क ऑर्डर जारी किया जाना होता है। इसके अलावा महज 12 दिन में यानी कि 96 वर्किंग घंटों में पहले निर्माण के लिए 1 करोड़ 30 लाख रुपये की राशि जारी कर दी गई। जिसके लिए बताया गया कि 52 स्तंभ बना दिए गए।
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इन 52 स्तंभ को बनाने में समय भी लगा होगा। उनकी टेस्टिंग भी हुई होगी। इसके बाद उसकी रिपोर्ट भी बनी होगी। लेकिन परिषद की आम बैठक में अधिकारी इस बात का कोई जवाब नहीं दे पाए कि उन्होंने महज 12 घंटे में ही स्तंभ के लिए एक करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान क्यों कर दिया गया? जबकि 6 टेस्टिंग पाइल्स का खर्च निर्माण एजेंसी द्वारा ही वहन किया जाना था। अधिकारियों ने एक तरह से स्वीकार कर लिया कि उन्होंने पहले गलत भुगतान किया और बाद में 1.88 करोड़ रुपया एजेंसी के बिल में से काट लिया गया। दूसरा बड़ा गोलमाल स्टील के लिए किया गया 5.79 करोड़ रुपये के मामले में सामने आया। जिसमें पूरे प्रोजेक्ट में ही जब 4.99 करोड़ रुपये का स्टील प्रयोग होना था तो इतनी ज्यादा राशि का भुगतान क्यों किया गया? इसके अलावा डीएनआईटी को बदलने जाने पर भी अधिकारी कोई जवाब नहीं दे पाए। पार्षद संतोष भोला ने चेयरपर्सन की भी जिम्मेवारी तय करने की मांग उठाई तो चेयरपर्सन सीमा कश्यप ने जवाब दिया कि उन्हें तकनीकी जानकारी नहीं है। अधिकारियों ने जो बताया, उसके अनुसार भुगतान किया गया। वहीं पार्षद राकेश सरदाना के अलावा पूर्व चेयरमैन यशपाल प्रजापति, मोहन लाल शर्मा, विनोद सोनी, पूजा अग्रवाल, रमा मित्तल, निशा गर्ग, नरेश मित्तल, दीपक शर्मा, एडवोकेट रमेश गुप्ता ने भी आवाज उठाई और कहा कि गलत भुगतान करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
कार्रवाई रजिस्टर में संभवत: पहली बार इतनी बार धज्जियां उड़ाए जाने का शब्द लिखा गया है। पार्षदों ने कई बार कार्रवाई में दर्ज करवाया कि ठेकेदार पर मेहरबानी करते हुए अधिकारियों ने अपनी नौकरी की परवाह नहीं की। नियमों की धज्जियां उड़ाई गई। भ्रष्टाचार किया गया। 4 घंटे की बैठक के बाद सभी पार्षद कार्रवाई की प्रति लेकर ही बैठक से निकले। अब देखना यह है कि सरकार इस मामले में क्या कार्रवाई करती है।
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हम तो मरे हुए पशु उठाने में ही रह गए बस : पार्षद गोपाल सैनी ने कहा कि एक पार्षद पर इतना काम रहता है कि वह अपने बच्चों की फीस तक जमा करवाने का समय नहीं निकाल पाता। अधिकारी इतना बड़ा फ्रॉड कर रहे हैं और हम सभी मरे हुए पशु उठवाने में ही रह गए। इस बात पर सभी का ठहाका लगा। साथ ही जब पार्षद राकेश सरदाना ने कहा कि क्या वर्क ऑर्डर का शेड्यूल जारी किया गया है। इस पर एमई राजकुमार ने कहा कि इब कौन सा टूल काड़ ल्याए आप? कुछ तो छोड़ दो। इस पर भी सही का हंसी का फव्वारा फूट पड़ा। ऐसे ही एक बार एमई राजकुमार ने कहा कि मुझे सर्दी में पसीने छूट रहे हैं साथ ही कहा कि फंस गए अब की बार तो। कोई जवाब नहीं मिल रहा। इस बात पर सभी का हंसी का फव्वारा छूट गया।
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