तड़कै की आज वा ऐन बरस री सै... दोस्तो आज शादी की एनवरसरी सै...
साहित्य गोष्ठी में साहित्यकारों ने प्रस्तुत की रचनाएं, कई साहित्य रचनाओं का विमोचन भी हुआ
फोटो नंबर 2
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। आरकेएसडी कॉलेज में साहित्य सभा दिसंबर माह की गोष्ठी केंद्रीय साहित्य अकादमी के भाषा सम्मान पुरस्कार से सम्मानित हरिकृष्ण द्विवेदी की अध्यक्षता में हुई। गोष्ठी संचालन रिसाल जांगड़ा ने किया।
गोष्ठी के दौरान डा. तेजिंद्र के शोध प्रबंध हिंदी गजल एवं अन्य काव्य विधायें, प्रो. अमृतलाल मदान के उपन्यास एक और त्रासदी, मधु गोयल के लघुकथा संग्रह थरथराती बूंद, महेंद्र पाल सारस्वत भजनोपदेश माला सदाबहार श्रीमद्भगवद गीता और डा. हरीश झंडई के काव्य संग्रह ढलते सूरज की किरणें जैसी साहित्य रचनाओं का विमोचन साहित्यकार डा. हरीश झंडई, हरिकृष्ण द्विवेदी, प्रो. अमृत लाल व कमलेश शर्मा के कर कमलों से संपन्न हुआ। गोष्ठी के दौरान कमलेश शर्मा व डॉ. प्रद्युन्न भल्ला ने कुछ पठनीय पुस्तकों का जिक्र किया।
खुद की ताकत की आजमाइश करने की चाहत रवींद्र रवि के इस शेर में देखिए फेंक दो दरिया के बीचों बीच मुझको अपने बाजू आजमाना चाहता हूं। आज के युग की प्रवृति को दर्शाता हुआ दिनेश बंसल दानिश की रचना कुछ यूं रहीं-नेकियां तो आपकी सारी भुला दी जाएंगी, गलतियां राई भी हो पर्वत बना दी जाएगी। डा. तेजिंद्र का व्यंग्य देखिये तड़कै की आज वा, ऐन बरसरी सै। दोस्तों आज शादी की ऐनवरसरी सै। सुधरने की चेतावनी देते हुए सतपाल शर्मा शास्त्री ने कहा कि आप्पा जे ना सुधारैगा तू, जीवन व्यर्थ गुजारैगा तू, सपने को परिभाषित करते हुए प्रोफेसर अमृत लाल मदान ने कहा कि सपने क्या है, जग भटकन है, हर कदम पे ज्यूं अड़चन है। मनुष्य के क्षणिक अस्तित्व को लेकर रामफल गौड़ ने कहा कि-के औकात बता माणस की, पत्थर नै भी हो सै घसणां। समाज में प्रेम भावना की तरफदारी करते हुए मधु गोयल ने कहा कि चाहि ए ना लहुं का तिलक लगाने वाला, होली का रंग लगाने वाला चाहिए। कोयल के माध्यम से समस्या का समाधान बताते हुए सरोज जोशी ने कहा कोयल कहती है समस्याओं का हैं, एक समाधान रखो न अभिमान। पत्नी पीड़ित कर्मचंद केसर ने कहा कलम खोस कै, झाडू दे दिया। करता फिरू सफाई बाबा। आज के समाज को लेकर हरिकृष्ण द्विवेदी ने कहा जिंदगी से रूखस्त अब, संस्कार हो गए, धर्म पूजा पाठ भी व्यापार हो गए। इस मौके पर कमलेश शर्मा, डॉ. प्रद्युम्न भल्ला, रिसाल जांगड़ा, डॉ. हरीश झंडई, सतीश शर्मा, शमशेर सिंह कैंदल, सतबीर जागलान, दिलबाग सिंह, श्याम सुंदर गौड़, महेंद्र पाल शर्मा, डॉ. चतुरभुज बंसल, शोभा स्वामी, टीसी अग्रवाल, उषा गर्ग व चंद्रकांता ने भी विचार रखे।