वन विभाग द्वारा लगाए गए जुर्माने का विरोध, किसानों ने की बैठक
अधिकारियों के समक्ष उठाया जाएगा मुद्दा
अमर उजाला ब्यूरो
पाई। गेहूं के फानों में लगी आग के बाद किसानों को किए गए जुर्माने के चलते किसानों में वन विभाग को लेकर रोष व्याप्त है। इस संबंध में किसानों की बैठक हुई। जिसमें किसानों ने वन विभाग के अधिकारियों से मिलकर स्थिति स्पष्ट करने का फैसला लिया है।
किसानों ने बताया कि अज्ञात लोगों द्वारा 7 मई 2018 को खेतों में गेहूं के अवशेष जलाने हेतु लगाई गई थी। आग में जले काफी समय पहले से सूखे पेड़ों का जुर्माना वन विभाग ने निर्दोष किसानों पर लगाया दिया। जब किसान इस बारे में संबंधित अधिकारी दरोगा चांदवीर मिले तो उन्होंने अपनी कार्रवाई को उचित ठहराया और इसके लिये किसानों को ही दोषी ठहरा दिया। न्याय के लिये सभी किसान इसकी उचित जांच के लिए जिला वन अधिकारी से मिले। जिला वन अधिकारी ने किसानों को संबोधित अधिकारी की कार्रवाई की पुन: जांच का आश्वासन दिया। संबंधित किसान दयाल सिंह, जिन्होंने अपना खेत ठेके पर दरबारा को दिया हुआ है, दोनों दरबारा व दयाल सिंह को 19-19 हजार का नोटिस जारी किया। इसी तरह दयाल सिंह के भतीजे कुशल, जिन्होंने अपना खेत ठेके पर 2017-18 में बलकार को तथा अब आगे 2018-19 के लिए अंग्रेज सिंह को दिया था, तीनों को दोषी ठहराते हुए नोटिस जारी किया गया है। जब और अन्य कुछ किसानों को, जिनके खेत इन्हीं खेतों से लगते हैं, उन्हें कोर्ट के पचड़े का भय दिखाकर, मिलीभगत कर छोड़ दिया गया। सभी किसानों की मांग है कि संबंधित अधिकारी की सही जांच की जाए ताकि भविष्य में बेगुनाह किसानों को लूटने से बचाया जा सके। परेशान किसान दरबारा, अंग्रेज, बीरा, बलकार, दयाल सिंह के साथ करतारा, धीरा, तेजपाल, विरेन्द्र, कपिल, बलबीर, आदि कई किसान थे
सूखने पर वन विभाग क्यों नहीं लेता सुध : किसानों ने बताया कि सबसे बड़ी लापरवाही वन विभाग की है और इस लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतान पड़ता है। किसानों ने बताया कि तेज हवा, तूफान में वृक्ष गिरकर जाते है या दीमक आदि अन्य किसी कारण से वन विभाग का पेड़ सुख जाता है तो वन वन विभाग द्वारा उसे निकालने का कोई सुनिश्चित प्रावधान नहीं है। काफी समय तक ये वृक्ष सड़कों पर या किसान के खेत में पड़े रहते है। इन पड़े हुये सूखें पेड़ों को लोगों द्वारा निकाल लिए जाते हैं या उन्हें दीमक खाए जाती है।