17 वार्डों की कॉलोनियों अवैध, सड़क व सीवरेज की समस्या से जूझ रहे निवासी
- आधे से ज्यादा शहर में अवैध कालोनियों के कारण नहीं हो रहे विकास कार्य, वोट मांगने के लिए आने वाले नेता भी नहीं कर रहे सुनवाई
फोटो नंबर-58 से 60
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। शहर में स्थित 31 वार्डों में से 17 वार्डों की कॉलोनियों का अवैध होना यहां निवासियों के लिए अभिशाप बन गया है। इन कॉलोनियों में बिना सड़क व सीवरेज के लोगों का जीवन मुहाल हो गया है। कई वार्ड पूरी तरह से अवैध घोषित किए गए हैं। उन वार्डों के लोगों को अधिक परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं।
यहां पर विभिन्न पार्टियों के राजनेता व अन्य पार्षद उम्मीदवार विकास के नाम पर वोट की मांग तो करते हैं, लेकिन अब इस समस्या की ओर किसी का ध्यान नहीं है। पिछले तीन वर्षों से गली निर्माण से लेकर अन्य विकास कार्यों के टेंडर नहीं लगा है। इन कॉलोनियों के लोग टेंडर लगने की बाट जोह रहे हैं। यहां पर टेंडर लगने की बजाय कालोनियों के लोगों को अधिकारियों की अनदेखी का भी सामना करना पड़ रहा है। पूरी तरह से अवैध घोषित हुए वार्ड नंबर 17 व 18 की कालोनियों में सीवरेज की सफाई तक करवाने के लिए अधिकारियों की जी हजूरी करनी पड़ रही है। लेकिन उसके बावजूद भी लोगों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
सीवरेज व गलियों के निर्माण को तरसे : वार्ड नंबर 18 निवासी सुनील शर्मा ने कहा कि जब से बारिश का मौसम शुरू हुआ है, तभी सीवरेज की हालत खस्ता है। ये सीवरेज पिछली सरकार में बने थे। नालियां व सड़कें बदहाल हैं। घरों से निकलना मुश्किल हो चुका है।
जब वार्ड अवैध हैं तो पंचायत घोषित कर दो : वार्ड नंबर 18 के पार्षद प्रवीन शर्मा उर्फ काला सांघन ने बताया कि उसके वार्ड में देवीगढ़ रोड स्थित कालोनियों को अवैध घोषित किया गया है। यहां पर पिछली सरकार ने करोड़ों रुपये के विकास कार्य करवाए हैं। तो अब सरकार के विकास कार्यों को लेकर ढील क्यों बरत रही है। यहां पर विभिन्न पार्टियों के राजनेता वोट मांगने के लिए आते हैं। सवाल यह भी उठता है कि यदि यह कॉलोनी अवैध है तो वोटों को वैध कैसे किया गया है। सरकार के इस वार्ड में पार्षद का चुनाव ही नहीं करवाना चाहिए। बल्कि इसके गांव की पंचायत में जोड़ देना चाहिए। जिससे यहां पर विकास कार्य तो हो जाएंगे। यहां पर सीवरेज व नाले टूटे हुए हैं। जिन्हें तीन महीने से अधिक का समय भी बीत चुका है। यहां पर कालोनियों के अवैध होने के कारण विकास कार्य नहीं करवा सकती तो कम से कम यहां पर रिपयेरिंग तो करवा दें।
हो रहा भेदभाव : वार्ड नंबर 17 के पार्षद वेदप्रकाश ने बताया कि वार्ड में कालोनियों में कोई विकास कार्य न होने के साथ यहां पर सफाई से लेकर सीवरेज की खामियों को ठीक करने में भी भेदभाव किया जा रहा है। यहां पर बारिश के समय जान पर आ बनती है। यहां पर जलभराव के कारण गलियों से गुजरना भी मुश्किल हो जाता है। जब सीवरेज की सफाई के लिए जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कहा जाता है। वे कर्मचारियों की कमी बता अपना पल्ला झाड़ लेते है। जबकि एक या दो वार्डों को छोड़कर अन्य सभी वार्डों में एक एक कर्मचारी केवल सीवरेज की सफाई के लिए लगाए गए है। जबकि अवैध वार्डों में ऐसा नहीं है।
वार्डों में काम करवाने के लिए आला अधिकारियों से भी बातचीत की है। सरकार से मांग की गई है कि कॉलोनियों को वैध किया जाए। एक बार फिर इस संबंध में आला अधिकारियों से बात की जाएगी। ताकि लोगों की समस्या का समाधान हो सके।
सीमा कश्यप, चेयरपर्सन