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सर्विस स्टेशनों पर बेरोक-टोक बहाया जा रहा है बेशकीमती पानी

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सर्विस स्टेशनों पर बर्बाद किया जा रहा पानी
अनुमान के अनुसार, चौपहिया वाहन के लिए 50 से 70 लीटर और बाइक धोने के लिए 20 से 30 लीटर पानी का इस्तेमाल
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। जिले के मुख्यालय सहित सभी शहरों में सर्विस स्टेशनों पर बेरोक-टोक पानी बहाया जा रहा है। जिले भर में लगभग 150 में से 100 ने तो सीवरेज में पानी छोड़ने तक की अनुमति नहीं ली है। न ही जनस्वास्थ्य विभाग व नगर परिषद या नगर पालिकाओं के पास सर्विस सेंटरों को अनुमति देने या न देने संबंधी कोई नीति है। इसका लाभ लगातार व्यापारी उठा रहे हैं। हालांकि कई सर्विस स्टेशन संचालकों का कहना है कि वे अपने काम में पानी को बचाने के लिए रिचार्जेबल बोर का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि अधिकतर सर्विस सेंटरों में पानी व्यर्थ में बहता है।

150 में से 100 ने सीवरेज में पानी छोड़ने की नहीं ली है अनुमति
सर्विस स्टेशन स्थापित करने के समय में सरकार की ओर से अनुमति लेने का कोई प्रावधान नहीं है, जबकि पानी को लेकर जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से सीवरेज में पानी छोड़ने की संचालक को अनुमति लेनी पड़ती है। कुल 150 सर्विस स्टेशन हैं। इनमें से 100 सर्विस स्टेशन संचालकों ने सीवरेज में पानी छोड़ने की अनुमति नहीं ली है। अन्य 50 संचालक इस नियम के मुताबिक काम कर रहे हैं।
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रोजाना लाखों लीटर पानी बहता है नालियों में
एक वाहन धोने के लिए अनुमानत : 50 से 70 लीटर चार पहिया वाहन व 20 से 30 लीटर पानी मोटरसाइकिलों को धोने में इस्तेमाल किया जाता है। एक सर्विस सेंटर पर सुबह से लेकर शाम 20 से 40 चार पहिया वाहन और करीब 50 मोटरसाइकिलों को धोया जाता है।

नगर परिषद के सचिव कुलदीप मलिक ने कहा कि जब भी कोई व्यक्ति सर्विस स्टेशन स्थापित करता है तो वह पहले डेवलपमेंट चार्ज जमा करवाता है। लेकिन नगर परिषद के द्वारा इसके लिए अन्य कोई नियम सरकार द्वारा निर्धारित नहीं किया गया है। पानी निकालने के लिए या इस्तेमाल करने संबंधी अलग से कोई नियम नहीं है।
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जनस्वास्थ्य विभाग के अधीक्षण अभियंता एसके पाहवा का कहना है कि केवल सीवरेज में पानी डालने के लिए सर्विस सेंटर संचालक को अनुमति लेनी पड़ती है। यदि कोई बिना अनुमति के सीवरेज में पानी छोड़ते हुए मिला तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। पानी निकालने या ना निकालने संबंधी विभाग के कोई निर्देश नहीं हैं।
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