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शहर में प्रशासन की नाक तले चल रहा है चारा मंडी के नाम पर बड़ा झोल

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बिना अनुमति वाले धर्मकांटे पर चल रही अस्थायी चारा मंडी
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जिस धर्मकांटे पर अस्थायी चारामंडी की अनुमति, वहां खाली बैठा रहता है कर्मचारी, रिकॉर्ड ही दर्ज नहीं हो रहा चारे का
हर रोज शहर में बिकता है 400 से 500 क्विंटल तक हरा व सूखा चारा
अमर उजाला ब्यूरो
कैैथल। शहर में लगने वाली चारा मंडी को लेकर बड़ा झोल है। जिस धर्मकांटे पर सरकार ने वर्ष 2007 में अस्थायी चारा मंडी चलाने की अनुमति दी थी, वहां चारा बिकता ही नहीं। किसी अन्य धर्मकांटे पर वैध-अवैध रूप से चारे की बिक्री हो रही है। इसका कोई रिकॉर्ड मेंटेन नहीं हो रहा है। मार्केट फीस की जिम्मेवारी शहर में चंद लाइसेंस धारक टोका वालों की है। इस पूरे झोल में किसान जहां मनमर्जी के रेटों से परेशान हैं, वहीं सरकार को राजस्व के तौर पर निश्चित तौर पर मोटा नुकसान हो रहा है।
प्रताप गेट पर बालाजी धर्म कांटा के संचालक ने सीएम विंडो में दी शिकायत में कहा कि उसे 2007 में विभाग ने अस्थायी मंडी चलाने की अनुमति दी थी। इसके लिए उसने विभाग को अपनी 1200 वर्ग गज जमीन दी हुई है। इसके लिए वह कोई किराया नहीं लेता। ताकि किसान अपना चारा वहां डाल कर तुलवा सकें। लेकिन एक जनवरी 2018 से मार्केट कमेटी अधिकारियों ने मिलीभगत करके चारे की अस्थायी मंडी अपने सिरटा रोड स्थित एक चहेते धर्मकांटे पर लगवानी शुरू कर दी। तब से लेकर अभी तक उसके धर्मकांटे पर किसान चारा लेकर नहीं आते। जब उसने विरोध किया तो कर्मचारी उसी के धर्मकांटे पर ड्यूटी देता है। जबकि आवक कहीं और होती है। रिकॉर्ड में वह मंडी उसी के धर्मकांटे पर दिखा रहा है। जो नियमानुसार गलत है।
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इस पूरे झोल में कई सवाल उठते हैं। जिन पर विभाग का जवाब स्पष्ट नहीं हैं।
1. यदि विभाग ने बालाजी धर्मकांटे को अस्थायी मंडी के तौर पर अनुमति दी है तो वहां चारा क्यों नहीं तुलवाया जा रहा?
2. जब यहां चारा ही नहीं पहुंचता तो कर्मचारी यहां नियमित तौर पर खाली बैठकर ड्यूटी क्यों कर रहे हैं?
3. इस धर्मकांटे पर जब तुलाई नहीं हो रही तो रिकॉर्ड में इसी के नाम से अस्थायी मंडी क्यों चल रही है?
4. शहर में दूसरी जगह बिक रहे चारे की मात्रा पर विभाग की नजर कैसे है? जबकि कर्मचारी बालाजी धर्मकांटे पर ड्यूटी दे रहा है।
5. फीस पूरी जमा हो रही है या नहीं? विभाग की इस बारे में निगरानी के लिए क्या नीति है? कुछ लोग फीस को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं।

मार्केट कमेटी सचिव मनजीत के जवाब
1. विभाग ने 2007 में बालाजी धर्मकांटे को अस्थायी मंडी की अनुमति दी थी। इसलिए वहां कर्मचारी ड्यूटी करता है।
2. बालाजी धर्मकांटे का संचालक किसानों के चारे की तुलाई नहीं करता। इसलिए किसान दूसरी जगह चारा बेच रहे हैं।
3. बालाजी धर्मकांटा संचालक ने कोर्ट में केस किया हुआ है और उसने सीएम विंडो में शिकायत दी थी। आला अधिकारियों ने सीएम विंडो की शिकायत के चलते इस धर्मकांटे पर ड्यूटी के लिए कहा है। इसलिए वहां एक कर्मचारी ड्यूटी देता है। लेकिन किसान ही वहां पर चारा लेकर नहीं जाते।
4. शहर में बिकने वाले चारे पर फीस जमा करवाने की जिम्मेदारी चारा खरीदने वाले की होती है। मैं हर सप्ताह अपनी फीस जमा करवाता हूं।
5. फीस घटी है या बढ़ी है, रिकॉर्ड देखकर ही बता सकता हूं।
6. बालाजी धर्मकांटा संचालक द्वारा चारे की तुलाई के लिए 30 की बजाय 50 व इससे अधिक रुपये वसूलने की जानकारी भी मिली थी।

अब रिकॉर्ड मेंटेन नहीं हो रहा
सोमवार की सुबह बालाजी धर्मकांटे पर ड्यूटी दे रहे कर्मचारी ने कहा कि यहां कोई किसान चारा लेकर नहीं आता। यदि आता है तो यहां उसके चारे की तुलाई नहीं होती। इसलिए किसान दूसरी जगहों पर चारा बेचते हैं। उसके रिकॉर्ड को मेंटेन नहीं किया जा पा रहा है। वे अधिकारियों के निर्देशानुसार यहां ड्यूटी दे रहे हैं।
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पूरे मामले में जांच की जरूरत
हर रोज किसानों से मनमर्जी के रेटों पर हो रही चारे की खरीद व अनुमति वाली जगह चारे की बिक्री न होने के बावजूद आला अधिकारियों का कोई ध्यान नहीं हैं। इसलिए इस पूरे मामले की जांच करनी चाहिए और चारे की बिक्री को लेकर पारदर्शी व्यवस्था बनाए जाने की जरूरत है।
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मुझे अभी पता नहीं है कि क्या मामला है। सचिव से पूरे प्रकरण की जानकारी हासिल की जाएगी। इसके बाद ही कुछ बताया जा सकेगा।
- कमलप्रीत कौर, एसडीएम एवं प्रशासक कैथल मार्केट कमेटी।
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