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14 महीने में कई झटके झेल चुकी सरकार मंझधार में

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14 महीने में कई झटके झेल चुकी सरकार मझधार में
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। मई 2016 में भाजपा द्वारा पूरी जोर आजमाइश करके बनाई गई शहर की सरकार 14 महीनों में कई झटकों के साथ यहां तक पहुंची थी कि अब 22 पार्षदों के विरोध का झंडा बुलंद किए जाने के बाद मझधार में हैं। हालांकि अविश्वास प्रस्ताव के लिए आवश्यक 31 में से 21 की बजाए विरोधी गुट ने 22 पार्षदों का समर्थन जुटा लिया है। जिसमें 14 भाजपा, निर्दलीय व बसपा समर्थित हैं तो 8 कांग्रेस समर्थक पार्षद शामिल हैं। अब देखने वाली बात यह है कि अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने तक इन 22 पार्षदों की एकजुटता बनी रह सकती है या नहीं। विरोधी गुट में कई पार्षद भाजपा के बड़े पदाधिकारियों, सरकार में बड़े पदों पर आसीन लोगों के परिवारों से भी हैं।
मई 2016 को नगर परिषद चुनाव के बाद यशपाल प्रजापति को चेयरमैन व कांग्रेस गुट से डा. पवन थरेजा को वाइस चेयरमैन चुना गया था। उस दौरान चेयरमैन के लिए कांग्रेस समर्थक पार्षदों ने मोहन लाल शर्मा को उम्मीदवार बनाया गया था। तो राकेश सरदाना व बबिता मित्तल ने भी चेयरमैन पद के लिए चुनाव लड़ा था। जिसमें यशपाल प्रजापति को 14, मोहन लाल शर्मा को 11, बबिता मित्तल को 4 व राकेश सरदाना को 2 वोट मिले थे।
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इसके बाद कई बार सत्ता पक्ष के पार्षद अपनी अनदेखी का रोना रो चुके थे। लेकिन चेयरमैन गुट द्वारा उन्हें मना लिया गया। लेकिन चेयरमैन यशपाल प्रजापति के पारिवारिक विदेशी दौरे के दौरान उनके खिलाफ एकजुटता होती गई और परिणाम 22 पार्षदों के विरोध के रूप में सामने आया।
बुधवार से ही सरकार, संघ व भाजपा का नाराज पार्षदों को मनाने का दौर जारी था। पार्षदों के परिजनों से भी संपर्क साधा जा रहा था। भाजपा के स्टार प्रचारक रहे रॉकी मित्तल से उसके भाई को मनाने की जिम्मेवारी सौंपी गई। इसी तरह अन्य लोगों की भी जिम्मेवारी लगाई गई। लेकिन कोई पार्षद टस से मस नहीं हुए।
पार्षदों में वार्ड नंबर 4 से निशा रानी ने कहा कि ऊधम सिंह पार्क में एक सफाई कर्मचारी लगाया है। 8 माह से उसका मानदेय नहीं मिला। मुझे जेब से देना पड़ेगा। इसी तरह कामों को लेकर कोई सुनवाई नहीं हुई।
पार्षद राकेश सरदाना ने कहा कि पार्षदों से लोगों की उम्मीदें रहती हैं। यदि वे काम नहीं करवा पाएंगे तो लोग उनका विरोध करते हैं। सभी के काम होने चाहिए।

मेरे भाई ने भी नहीं सुनीं
रॉकी मित्तल के भाई एवं 21 से पार्षद नरेश मित्तल ने कहा कि मुख्यमंत्री को लिखित शिकायत दी गई। संगठन में छोटे से लेकर बडे़ अधिकारियों के अलावा मेरे भाई रॉकी मित्तल को भी अनदेखी की शिकायत की। किसी ने नहीं सुनीं तो विरोध करना पड़ा। लोग काम चाहते हैं। सड़कों में बड़े गड्ढे बने हुए हैं। इतना भ्रष्टाचार सहन नहीं हो सकता।
सरदार हरजिंद्र सिंह ने कहा कि उनके वार्ड में कोई काम नहीं हुआ। जिस कारण विरोध किया।
कुलदीप सैनी का कहना है कि सरकार के साथ हैं। लेकिन चेयरमैन की कार्यप्रणाली से सभी नाराज हैं। इसी कारण विरोध किया।
वार्ड नंबर 29 से पार्षद वीरेंद्र बिल्लू ने कहा कि 14 माह में केवल एक सफाई कर्मचारी। वह भी 15-15 दिनों में आता है। लोग विरोध करते हैं। ग्रांट मिली महज 5 लाख। कैसे वार्ड में काम करवाएं। उनकी पूरी तरह से अनदेखी हुई है।
बबिता मित्तल ने कहा कि वार्ड में कोई भी काम नहीं हुआ। जिस कारण मजबूरन विरोध करना पड़ा।
वाइस चेयरमैन डा. पवन थरेजा ने कहा कि चेयरमैन की कार्यप्रणाली से सभी असंतुष्ट हैं। इस कारण विरोध किया है।
वार्ड नंबर 20 से नरेश नायक ने कहा कि उनके वार्ड में काम न होने के कारण वे विरोध में हैं।
मोहन लाल शर्मा ने कहा कि चेयरमैन को कई बार चेताया गया। लेकिन उन्होंने कार्यप्रणाली नहीं बदली। जिस कारण विरोध किया है।
संतोष भोला के पार्षद प्रतिनिधि एडवोकेट धर्मबीर भोला ने कहा कि नगर परिषद में प्रशासन सही नहीं हैं। जिस कारण 14 भाजपा व 8 कांग्रेस समर्थक पार्षदों ने एकजुट होकर केवल चेयरमैन का विरोध किया है। उन्हें हटाने की मांग की है। उनका प्रयास होगा कि अगला चेयरमैन भाजपा से ही हो। उन्होंने कई बार मांग की, लेकिन चेयरमैन की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं आया तो विरोध किया है।
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दूसरी ओर यशपाल प्रजापति ने कहा कि उनकी लड़ाई भ्रष्टाचार के खिलाफ है। यह जारी रहेगी। शहर में निष्पक्ष तरीके से काम हुए हैं। जनता का विश्वास उन्हें हासिल है।
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