संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। दिवाली का पावन पर्व रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश के पूजन बड़ा महत्व रहेगा। इस बार शाम 5:38 से लेकर 7:35 तक मां लक्ष्मी और प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के पूजन का शुभ मुहूर्त रहेगा।
कार्तिक माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत 12 नवंबर को दोपहर दो बजकर 43 मिनट पर होगी। जबकि 13 नवंबर को दोपहर दो बजकर 56 मिनट पर समाप्त होगी। यह जानकारी हनुमान वाटिका के पुजारी विशाल शर्मा ने दी है।
उन्होंने बताया कि मां लक्ष्मी-गणेश के पूजन से घर में सुख-समृद्धि आती है। सनातन धर्म में दिवाली पर्व को सुख का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि दिवाली के दिन घर की साफ-सफाई और सजावट करने के साथ लक्ष्मी-गणेश के पूजन से धन-दौलत में बरकत होती हैं और घर में मां लक्ष्मी का वास होता है।
दिवाली की पूजा में यह प्रयोग करें सामग्री ः उन्होंने बताया कि दिवाली की पूजा में धूप, दीप, रोली, कुमकुम, अक्षत, हल्दी, सिंदूर, केसर, कपूर, कवाला, दुर्वा, फल, फूल, गन्ना जनेऊ, पान का पत्ता, गुलाब और चंदन का इत्र, कमल गट्टे की माला, शंख, चांदी का सिक्का, आम का पत्ता, गंगाजल, चौकी, हवन सामग्री, फूलों की माला, नारियल, लौंग, इलायची, वस्त्र, रुई, शहद, दही, गुड़, धनिया के बीज, पंचामृत, खील बताशे, पंच मेवा, मिठाई, सरसों का तेल या घी, मिट्टी का दिया और केले का पत्ता प्रयोग करें। मां लक्ष्मी को खीर बहुत प्रिय है, इसलिए भोग लगाएं।
स्नेह सहजता और सरलता के जलाएं दीप
कैथल। पंडित रवि दत्त शास्त्री ने कहा कि दीये जलाने का पर्व है। बताया कि आदमी हर रोज घर के भीतर दीपक जलाता है, लेकिन दीपावली पर वह एक नहीं, अनेक दीपों को घर के बाहर जलाता है। घी और तेल के दीयों के साथ स्नेह, सहजता, सरलता व सत्यता के दीये जलाए, जिससे बाहर के साथ हमारे भीतर भी उजियारा हो सके और तभी हमारा दीप उत्सव मनाना सार्थक हो पाएगा।
उन्होंने कहा कि हम दिवाली पर मिठाई ही नहीं अपितु प्रेम बांटे, पटाखे नहीं दुर्गुणों को जलाएं, घर को नहीं ह्रदय को भी सजाएं फिर हृदय रूपी अयोध्या में प्रभु राम का स्वयं आगमन हो जाएगा | दीपावली अंतर्मन का पर्व भी है। इस पर्व पर लक्ष्मी का पूजन करना है, लेकिन लक्ष्मी जी घर में आए वह पाप की कमाई ना हो वह धर्म के अनुसार कमाई गई हो तभी वह फलवती होती है। संवाद