कैथल। अनाज मंडी में इस बार हालात बेकाबू हैं। मंडी में न खरीद, न उठान, न भुगतान न बारदाना। स्थिति इस कदर खराब है कि 3 लाख से अधिक क्विंटल गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा है। खरीद न के बराबर हो रही है। उठान न होने के कारण प्रति बैग 2 से 3 रुपये रिश्वत की राशि चल रही है। बारदाना न होने के कारण बुधवार को नई अनाज मंडी में खरीद न के बराबर हुई। आढ़तियों की फूट के चलते अधिकारी भी एक तरह से इन समस्याओं पर आंखें बंद किए हुए हैं। आढ़तियों ने दो ट्रक चालकों को उठान के लिए तीन रुपये प्रति कट्टा की मांग करने पर पुलिस के हवाले किया गया। लेकिन डीएफएससी विभाग की ढुलमुल नीति के चलते पुलिस ने दोनों चालकों को रपट दर्ज करके छोड़ दिया।
नई अनाज मंडी में आढ़तियों ने बताया कि जब से खरीद शुरू हुई है, करीब-करीब तभी से आढ़तियों को एक रुपये तक का भुगतान नहीं हुआ है। प्रशासनिक अधिकारियों का तो दावा है कि आढ़तियों के खाते में भुगतान होने लगा है। लेकिन कुछेक आढ़तियों को छोड़कर शेष का कहना है कि अभी उनके खाते में राशि नहीं आई है। हालांकि 7 दिन तक भुगतान ना होने पर बैंक को इस रकम पर ब्याज देना होगा। लेकिन फिलहाल तो आढ़ती भुगतान की मांग कर रहे हैं।
अकेले कैथल अनाज मंडी में मंगलवार रात तक करीब 11 लाख क्विंटल खरीद हुई थी। जिसमें से 7 लाख कट्टे अभी मंडी में ही पड़े हुए हैं। बुधवार को जो आवक हुई है, वह अलग है। नई अनाज मंडी में अंदर प्रवेश करने की जगह नहीं बची है।
बुधवार को न के बराबर हुई खरीद : बुधवार को हैफेड की खरीद थी। लेकिन एजेंसी के कर्मचारी आए। कुछेक दुकानों पर गए और बोली बंद कर दी। उनका तर्क था कि बारदाना ही नहीं है तो वे खरीद कैसे करें। आढ़ती दिन भर खरीद के लिए फोन करते रहे। लेकिन किसानों व आढ़तियों का इंतजार खत्म नहीं हुआ।
बदले मौसम से अटकी सांसें, मंडी में 3 लाख से अधिक बोरी बैग खुले आसमान के नीचे : बुधवार को अचानक मौसम में बदलाव भी हुआ। दोपहर करीब दो बजे के बाद हल्की बूंदाबांदी भी हुई। जिससे किसानों सहित आढ़तियों की सांसें अटक गई। नई अनाज मंडी में करीब 3 लाख कट्टे गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा है। इसमें से अधिकतर गेहूं की तो पैकिंग भी नहीं हुई।
रिश्वत मांग रहे दो ट्रक चालक पुलिस के हवाले किए, डीएफएससी विभाग की ढुलमुल नीति के चलते छोड़े : आढ़तियों ने बताया कि 2 ट्रक चालक उठान के लिए प्रति कट्टा 3 रुपये की रिश्वत राशि मांग रहे थे। जिसका वीडियो भी है। उन्हें पुलिस के हवाले किया गया। लिखित में शिकायत भी दी गई। लेकिन पता चला कि उन्हें छोड़ दिया गया। अनाज मंडी चौकी प्रभारी रणबीर सिंह का कहना है कि पुलिस ने रपट दर्ज कर ली है। जांच के बाद कार्रवाई होगी। दूसरी ओर सूत्रों ने बताया कि डीएफएससी विभाग की ओर से पुलिस को कहा गया कि आढ़ती खुद ही रिश्वत देते हैं। ट्रक चालकों द्वारा रिश्वत लिए जाने जैसी कोई बात नहीं हैं। डीएफएससी विभाग के ढीले रवैये के कारण पुलिस ने दोनों ट्रक चालकों को छोड़ दिया।
कोई बड़ा अधिकारी नहीं ले रहा मंडी की सुध : खरीद एजेंसियों के अधिकारियों को छोड़कर मंडी में इस समय कोई सुध नहीं ले रहा। पूर्व के सीजन में डीसी सहित विभाग मुख्यालय स्तर से भी किसी ना किसी अधिकारी की ड्यूटी लगती थी। जो किसानों व आढ़तियों की समस्याएं सुनने के लिए आते थे। लेकिन इस सीजन में कोई बड़ा अधिकारी मंडी की सुध नहीं ले रहा। किसानों व आढ़तियों को खरीद एजेंसियों के अधिकारियों की मनमानी के हवाले किया हुआ है।
डीसी डा. प्रियंका सोनी से सीधी बातचीत : 1. मंडी में भुगतान नहीं हो पा रहा है। जिस दिन से खरीद शुरू हुई है, उसी दिन से कई आढ़तियों को भुगतान नहीं हुआ है।
- इस बार 7 दिन के अंदर अंदर भुगतान किया जाना है। कई आढ़तियों के खाते में रुपये आने शुरू हो गए हैं। सात दिन तक नहीं मिलते हैं तो पता किया जाएगा।
2. अनाज मंडी में उठान की भयंकर समस्या है। प्रवेश तक का रास्ता नहीं बचा है। लोग परेशान हैं
-यह समस्या ध्यान में आई है। इस बारे में अधिकारियों को कहा जा रहा है। उठान तेज करवाया जाएगा।
3. बारदाने का संकट बना हुआ है। खरीद भी ना के बराबर हो रही है। आढ़तियों का कहना है कि बारदाना ना होने के कारण खरीद नहीं हो पा रही। गेहूं खुले आसमां के नीचे पड़ा है?
-बारदाने की समस्या राज्यस्तर पर है। इसके लिए दूसरे राज्यों से भी संपर्क किया जा रहा है। उम्मीद है कि इस समस्या का जल्द समाधान हो जाएगा।
हमारे साथ मारपीट होना बाकि, कपड़े फाड़े जा रहे हैं : नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मित्तल ने कहा कि अभी उनके साथ केवल मारपीट होना बाकी है। बारदाने के लिए उनके कपड़े फाड़े जा रहे हैं। आढ़ती खुद की फूट के चलते लूट का शिकार हो रहे हैं। मंडी बेहाल है। कोई सुध नहीं ली जा रही।
पूर्व प्रधान अश्वनी शोरेवाला का कहना है कि ऐसा लगता है कि मंडी को लावारिश छोड़ दिया गया है। न उठान, न भुगतान, न खरीद, न बारदाना। बारदाने के लिए आढ़ती मारे-मारे फिर रहे हैं। पता नहीं इस बार कैसे सीजन निकलेगा। भारी परेशानी हो रही हैं।
दूसरी ओर एक आढ़ती ने कहा कि यह सीजन चुनाव की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
उधर, कलायत अनाज मंडी सहित सभी खरीद केंद्रों पर गेहूं की आवक इस समय पूरे जोरों पर है। मंडी में भारी आवक के बावजूद खरीद एजेंसियों के भराव व उठान कार्य बहुत सुस्त गति से होने के कारण किसानों व व्यापारियों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। व्यापारी राजेंद्र कुमार, जगदीश, जयप्रकाश आदी का कहना है कि कलायत मंडी सहित खरीद केंद्रों पर अब तक जो गेहूं खरीदी गई है उसका 20 प्रतिशत भी उठान नहीं हो पाया। किसान रामेश्वर, जोगी राम, रामकुमार आदी का कहना है कि गेहूं की लदाई करवाने में मार्केट कमेटी सहित जिला प्रशासनिक अधिकारियों को भी इस पर संज्ञान लेना चाहिए। कलायत मंडी सहित सभी खरीद केंद्रों पर गेहूं की आवक 5,62,210 क्विंटल हो चुकी है जिसमें से लदाई का कार्य केवल मात्र 1,00,875 क्विंटल ही हो पाया है।
वहीं बुधवार दोपहर कुछ देर के लिए हुई बारिश में चीका की अनाज मंडियों पड़े लाखों गेहूं के कट्टे भग गए। हालांकि बारिश कुछ देर के लिए हुई थी और इससे गेहूं की बोरियों को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ लेकिन आढ़तियों का कहना है कि जिस प्रकार से लदान का काम ढुलमुल तरीके से चल रहा है उससे नहीं लगता कि मंडियों में पड़ा गेहूं अगले कई दिनों तक भी उठाया जा सकेगा। आढ़ती अशोक कुमार, सूरजभान ने कहा कि चीका की दोनों मंडियों में लाखों बोरियां गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ी है। यदि मौसम खराब होता है तो यह सारा गेहूं बरसात की भेंट चढ़ जाएगा और इसका खामियाजा आढ़तियों को उठाना पड़ेगा। आढ़तियों ने प्रशासन से मांग की है कि ठेकेदार को जल्द से जल्द गेहूं उठान के आदेश दिए जाएं ताकि अधिक से अधिक गेहूं भंडारण स्थल तक पहुंचाया जा सके।
राजौंद नगर के असंध रोड पर स्थित अनाज मंडी में गेहूं की आवक पूरे जोरों पर है। हर रोज पल पल में बदल रहे मौसम के दौरान भी मंडी में गेहूं की आवक आए दिन बढ़ती ही जा रही है। राजौंद मंडी प्रधान महीपाल राणा ने बताया की अभी तक राजौंद मंडी में 4 लाख 25 हजार गेहूं के कट्टों की खरीद हरियाणा वेयर हाउस द्वारा की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि मंडी में गेहूं का सीजन पूरे जोरों पर है। उधर किसानों व आढ़तियों ने कहा कि मंडी में खरीदी गई गेहूं के उठान का कार्य बहुत धीरे चल रहा है। जिससे उन्हें भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि उठान कार्य को तेज किया जाए ताकि किसानों को मंडी में गेहूं डालने में कोई परेशानी न हो।